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________________ नाम - विभक्ति (Case declesion) १) प्रथमा विभक्ति : (Nominative) कर्ताकारक (यहाँ वाक्य का 'कर्ता' प्रथमा विभक्ति में है।) १) अरविंदो गच्छइ । - अरविंद जाता है। २) नेहा भुंजइ । - नेहा भोजन करती है । ३) फलं पडइ । - फल पडता है। २) द्वितीया विभक्ति : (Accusative) कर्मकारक (यहाँ वाक्य का 'कर्म' द्वितीया विभक्ति में है । ) १) अहं पोत्थगं पढामि । - मैं किताब पढता हूँ / पढती हूँ। २) निवो गाम रक्खइ । - राजा गाँव की रक्षा करता है । ३) सिहो तिणं न भक्खइ । - सिंह घास नहीं खाता । ३) तृतीया विभक्ति : (Instrumental) करणकारक (यहाँ क्रिया का 'साधन' तृतीया विभक्ति में है।) १) तुम हत्थेण लिहसि । - तुम हाथ से लिखते हो । २) अम्हे कण्णेहिं सुणेमो । - हम कानों से सुनते हैं। ३) छत्तो विणएण सोहइ । ___ - विद्यार्थी नम्रता से शोभता है । ४) पंचमी विभक्ति : (Ablative) अपादानकारक (चीज जिस स्थल से दूर जाती है, उस स्थलकी विभक्ति 'पंचमी' है ।) १) हत्थाओ थाली पडिया । - हाथ में से थाली गिर पडी ।
SR No.009952
Book TitleJainology Parichaya 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNalini Joshi
PublisherSanmati Tirth Prakashan Pune
Publication Year2009
Total Pages28
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size137 KB
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