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________________ १०८] जैन साहित्य संशोधक एटले इ. स. पूर्वे ५२७ मां थयार्नु जणावीए तो आपणने आ अनुमानना संबंधमा शक उठे खरो. कारण के बुद्ध निर्वाणनी, जनरल कनिंगहाम अने प्रो. मेक्समुल्लरे पहेलीज वखत अने मारा अभिप्राय प्रमाणे बराबर रीते निर्णीत करेली मिति इ. स. पूर्वे ४७७ मां आवे छे अने सघळा मूळ लेखो एकमते निर्वाण समये तेमनी ऊमर ८० वर्षनी बतावे छे, ते उपरथी ते इ. स. पूर्वे ५५७ मां जन्म्या होवा जोईए. आ उपरथी ए स्पष्ट छ के जो महावीर इ.स. पूर्वे ५२७ मां निर्वाण पाम्या होय तो बुद्ध ते समये ३० वर्षनी वयना होवा जोईए. परंतु बुद्धे पोतानी ३६ वर्षनी वय पहेलां लगभग इ. स.पूर्वे ५२१ मां बुद्धत्व प्राप्त नहि करेलु होवाथी अने अनुयायिओपण नहि मेळवेलाहोवाथी,ते समयमां महावीरने कदापि मळीशके एतद्दन असंभवित छे.आ उपरांत वळी बन्ने अजातशत्रुना राज्यकाल दरम्यान विद्यमान हता एम पण आपणे जाणीए छीए.आराजा बुद्धनिर्वाण पहेला ८ वर्षे अभिषिक्त थयो हतो अने तेणे ३२ वर्ष राज्य कर्यु हतुं. तेथी पण उपरोक्त मितिओ बिल्कुल अविश्वसनीय बने छे. आटला माटे, महावीरना निर्वाणनी मिति कांतो इ. स. नी शरुआतनी वधारे नजदीक लाववी जोईए, अगर तो बुद्धना निर्वाणनी तारीख आगळ खसेडवी जोईए. परंतु इ. स. पूर्वे ५२७ वाळी महावीरनिर्वाणनी तारीख परंपरागत होवाथी अने बुद्ध निर्वाणनी इ. स. पूर्वे ४७७ नी मिति मात्र संशोधित होवाथी कदाचित् कोईने बाजी मितिने माटे-बुद्धनी निर्वाणमितिनी सत्यताना संबंधमां शंका उठे. आ उपरांत मि. विन्सेन्ट स्मिथ आदि विद्वानोनी नवीन शोधमां बुद्धनिर्वाणनो समय इ. स. पूर्व ४८६ अगर ४८७ वर्षे स्थापित करवामां आव्यो छे अने डॉ० फ्लीटनी शोध अनुसार इ.स. पूर्वे ४८२-८३ मां स्थापित थाय छे. उपर निर्दिष्ट शोधो जो खरेखर साची नीवडे तो महावीरनिर्वाणना इ स. पूर्वे ५२७ ना समयनी सत्यताना संबंधमां संभावना उपस्थित थाय. परंतु हुं उपरोक्त फेरफारोमां कांई तथ्य समाएलुं मानतो नथी, अने विशेषमा मानुं छु के जनरल कनिंगहामे अने प्रो. मेक्समुल्लरे जे बुध्द निर्वाण- वर्ष इ. स. पूर्वे ४७७ मुं नक्की कर्यु छे ते प्रामाणिक छे; अने तेथी मारा आमतने साबीत करवाते समयना निर्णय योग्य बधी महत्वनी कीबाबतोनो एकवार फरीथी अहीं विचार करवो उचित धारुं छु. हिंदुस्थाननी साची कालगणना, अलेकझेन्डरना हुमलाबाद, चंद्रगुप्तथी शरु थाय छे. परंतु हजी सुधी चंद्रगुप्तना अभिषेकना काळनो संपूर्ण रीते निर्णय थयो नथी; कारण के विद्वानोना मतान्तरो अनुसार अभिषेकनो समय इ. स. पूर्वे ३३५ थी ३१२ वच्चे होवार्नु मनाय के. वली बद्ध अने चंद्रगप्तनी वञ्चना समयना संबंधमां, जना ग्रंथोमां आपेली गणत्री वजनवाळी लागती नथी. तेथी करीने मॉ. सेनार्ट (इ० ए० २०, २२९) अने मि. वी. गोपाल ऐय्यर (पु० ३७, पृ० ३४१) अने अन्य विद्वानोना मानवा प्रमाणे माझं पण एम मानबुं छे के कालगणनानी शरुआत मात्र अशोकना शिलालेखोथी ज थई शके तेम छे. डॉ. बुलरे, इ० ए० पु० ६, पृ० १४९; पु० २२, पृ० २९९; ए० इ० पु० ३, पृ० १३४ उपर; अने डॉ० लीटेज० रा०ए० सो० १९०४, पा०१ मांजे सूचना करली छे के सिद्दापुर, स अने रूपनाथनी आशाओना अंतमा २५६ नो अंक छे,ते बुद्धना निर्वाण पछी व्यतीत थएली वर्षसंख्या सूचवे छे. ते सूचनानुं डॉ. एफ्. डबल्यु. टोमसे (J. A. 191c, p. 507 ) संपूर्ण रीते निराकरण कर्यु छे. ते जे अनिषेध्य प्रमाणथी आ बाबत साबीत करे छे तेनो अर्थ एम समजवानो छे के आ आज्ञा प्रसिद्ध थई त्यारे २५६ रात्रिओ सुधी अशोक घर छोडीने चाल्यो गयो हतो. 57 आ लेख जोधामां आव्यो त्यार पहेलां आ सूचना अश्रद्धेय लागती न हती. 57. डॉ. थोमसना पाठने स्वीकारीने डॉ. फ्लीटे (J. R. A.S. 1910, p. 1301 ) तेना आधारे जे अनुमान कयु हतुं ते कोईपण रीते टके तेम नथी. माँ.लेवीए (J. A. 1911, p. 119 ) २५६ दिवसोनुं जे अनुमान कर्यु छे, ते मात्र शक्य छे. Aho! Shrutgyanam
SR No.009879
Book TitleJain Sahitya Sanshodhak Khand 02 Ank 01 to 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJinvijay
PublisherJain Sahitya Sanshodhak Samaj Puna
Publication Year1923
Total Pages282
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size20 MB
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