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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir अमायणं-६ परवीवाहकरणे कामभोगतिव्याभिलासे |४०| |सूत्र - 41 (६८) अपरिमियपरिग्गहं समणोवासओं पच्चकुखाइ इच्छापरिमाणं उवसंपजड़ से परिग्गहे दुबिहे पत्ते तं जहा सचित्तपरिग्गहे अचित्तपरिग्गहे य, इच्छापरिमाणस्स समणोवासएणं इमे पंच अइयारा जाणियव्वा तं जहा धणधन्नपमाणाइकूकमे खित्तवत्युपमाणाइक्कमे हिरन्नसुवन्नपभाणा- इक्कमे दुपयचउप्पयपमाणाइक्कमे कुबियपमाणाइक्कमे १४१ ॥ सूत्र- छ। (६९) दिसिवए तिविहे पत्रत्ते - उड्ढदिसिवए अहोदिसिवए तिरियदिसिवए दिसिवयस्स समणवासएणं इमे पंच अइयारा जाणियव्या तं जहा उड्ढदिसिपमाणाइक्कमे अहोदिसिपमाणाइक्कमे तिरियदिसिपमाणाइक्कमे खित्तबुड्ढी सइअंतरद्धा ॥४२॥ सूत्र (७०) उवभोगपरिभोगवाए दुविहे पत्रत्ते तं जहा- मोअणओ कम्मओ अ, मोअणओ समणीवासएणं इमे पंच अइयारा जाणिपव्वा तं जहा सचित्ताहारे सचित्तपडिबद्धाहारे अप्पउलिओसहिभक्खणया तुच्छोसहिभक्खणया दुप्पउलिओसहिभक्खणया । ४३१ सूत्र - ७ (७१) कम्मओ णं सममोवासएणं इमाई पनरस कम्पादानाई जाणियव्याइं तं जहाइंगालकम्मे वणकर साडीकम्मे भाडीकम्मे फोडीकम्मे दंतवाणिजे लक्खवाणिजे रसवाणिजे केसवाणिजे विसवाणिज्जे जंतपीलणकम्मे निल्लंछणकम्मे दवग्गिदावणया सरदहतलायसोसणया असईपोसणया । ४४ । सूत्र- 71 ( ७२ ) अनत्यदंडे चउव्विहे पन्नत्ते तं जहा अवज्झाणारिए पमत्तायरिए हिंसप्पयाणे पावकम्मोवएसे अनत्थदंडवेरमणस्स समणोवासएणं इमे पंच अइयारा जाणियव्वा तं जहा- कंदपे कुक्कुइए मोहरिए संजुत्ताहिगरणे उवभोगपरिभोगाइरेगे । ४५ । सूत्र- 8 | (७३) सामाइयं नामं सावज्जजोगपरिवञ्ज्ञ्जणं निरवज्जजोगपडिसेवणं च ।४६-११(७४) सिक्खा दुविहा गाहा उबवायटिई गई कसाया य बघंता वेयंता पडिवजा इक्कमे पंच (७५) सामाइ अंमि उकए समणो इव सावओ हवइ जम्हा एएणं कारणं बहुसो सामाइयं कुज्जा (७६) सव्वंति माणिऊणं विरई खलु जस्स सव्विया नत्यि सो सव्वविरइबाई चुक्कड़ देसं च सव्वं च ॥२१॥-3 (७७) सामाइयस्स समणोवासएणं इमे पंच अइयारा जाणियव्वा तं जहा मणदुप्पणिहाणे दुष्पणिहाणे कामदुप्पणिहाणे सामाइयस्स सइअकरणया सामाइयरस अणयट्ठियस्स करणया १४६ | सूत्र (७८) दिसिव्वयगहियस्स दिसापरिमाणस्स पइदिनं परिमाणकरणं देसावगासिपं देसावगासियस्स समणोवासएणं इमे पंच अइयारा जाणियव्वा तं जहा आणवणप्पओगे पेणपओ सहाणुवाए रूवाणुवाए बहिया पुग्गलपक्खेचे | ४७| सूत्र- 10 (७९) पोसहोववासे घउविहे पत्ते तं जहा आहारपोसहे सरीरसक्कारपोसहे बंभचेरपोसहे अव्वावारपोसले, पोसहोववासस्स समणोवासएणं इमे पंच अइयारा जाणिव्वा तं जहाअप्पडिलेहिय-दुम्पडिलेहिय-सिज्जासंथारए अप्पमजिय-दुप्पमजिप-सिज्जासंचारए अम्पडिलेहियदुष्पडिलेहिय- उच्चार पासवणभूमीओ अप्पमजिय- दुप्पमजिय- उच्चारपासवणभूमीओ पोसहोचवासस्स सप्पं अन्नुपालया ॥४८॥ सूत्र- 1 | For Private And Personal Use Only 119811-2 ९ ॥२०11-2
SR No.009769
Book TitleAgam 40 Aavassayam Mulsutt 01 Moolam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherAgam Shrut Prakashan
Publication Year1996
Total Pages22
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 40, & agam_aavashyak
File Size1 MB
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