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________________ दें।गुणधर्म : यकृत व गुर्दे की बीमारियों में विशेष लाभदायक। मूत्र विरेचक, शरीर में आई सूजन को दूर करता है, पुनर्नवादि अर्क के साथ लेने पर पूरा लाभ मिलता है। मात्रा : सुबह शाम 1-1 गोली या वैद्यकीय सलाह के अनुसार 10 गौमूत्र गुड़मारादि अर्क घटक : 1. आँवला 100 ग्राम . व. चं. .. 127 . 2. हल्दी . . 100 ग्राम द्वितीय अध्याय, कुष्ठघ62 3. मेथी .. 100 ग्राम ___4. गुड़मार . . . 50 ग्राम 5. जामुन बीज 50. ग्राम अष्टम अध्याय, . . .. . म ग संग्रहणीय 284. 6. करेला . 50 ग्राम द्र. गु. वि. अष्टम अध्याय 298 7. कडु चिरायता 50 ग्राम . 8: गौमूत्र 2 लीटर निर्माण विधि : सभी घटक बारीक कूट पीसकर छानकर गौमूत्र में डालकर आसवन यंत्र द्वारा 1/2 भाग अर्क निकालें। अर्क को छानकर काँच की बोतल में भरकर बोतल को हवाबंद करना चाहिए। गुणधर्म : मधुमेह नियंत्रण हेतु मात्रा : वैद्यकीय सलाह के अनुसार 11. गौमूत्र मधुमेहारी वटी घटक : 1. आँवला 100 ग्राम ... 2. हल्दी . 100 ग्राम . 3. मेथी 100 ग्राम 4. गुड़मार 50 ग्राम 5. जामुन बीज ___50 ग्राम .. 50 ग्राम - 6. करेला .... 50 ग्राम 7. कडु चिरायता . 50 ग्राम . गौमाता पंचगव्य चिकित्सा 78
SR No.009393
Book TitleGaumata Panchgavya Chikitsa
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRajiv Dikshit
PublisherSwadeshi Prakashan
Publication Year2012
Total Pages130
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size4 MB
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