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________________ प्रद्योतिका टीका प्र. ३ उ. सु. ११९ शक्रादिदेवानां परिषदादिनि० १०२७ भुञ्जाना विहरन्ति अन्यत् सर्वं शक्रेन्द्रप्रकरणवत् । 'ईसानस्स णं भंते ! देविंदस्स देवरन्नो कई परिसाओ पन्नताओ गोयमा ! तओ परिसाओ पण्णत्ताओ तं जहासमिया चंडा जाया - तहेव सव्वं' हे भदन्त ! ईशाने यो देवेन्द्रो - देवराजस्तस्य कति पर्षदः सभाः प्रज्ञप्ताः ? भगवानाह - हे गौतम ! तिस्रः परिषदः सन्ति तद्यथासमित्ता१ चण्डा२ जाता ३ यत् - शक्रेन्द्रप्रकरणे तत्सर्वमेव ज्ञातव्यम् - तत्राऽभ्यन्तरिकी समिता नाम्ना प्रसिद्धा तस्यां पर्वदि कति देवसहस्राणि मध्यमिकायां कति, बाह्यायां च कति देवसहस्राणि प्रज्ञप्तानि ? एतत् प्रकरणान्तं यावत् 'तत्स' पदेन संगृहीतम् । उत्तरं तु - 'णवरं' इत्यादिना दर्शयति - भगवानाह - हे गौतम ! अभितरियाए परिसाए दसदेवसाहस्सीओ पन्नत्ताओ, मज्झिमयाए परिसाए बारसदेवसाहस्सीओ, बाहिरियाए चउदस देवसाहस्सीओ' आभ्यन्तरिकायां समिताही है 'ईसाणस्स णं भ'ते ! देविंदस्स देवरण्णो कति परिसाओ पन्नताओ' हे भदन्त ! देवेन्द्र देवराज ईशान की कितने परिषदाएं कही गई है ? उत्तर में प्रभु कहते हैं- 'गोयमा ! तओ परिसाओ पन्नत्ताओ' हे गौतम! तीन परिषदाएं कही गई हैं । 'तं जहा' जो इस प्रकार से है - 'समिता, चंडा, जाता, तहेव स' समिता, चंडा, और जाता, इस सम्बन्ध में जो शकेन्द्र के प्रकरण में कहा गया है वह यहां पर कह लेना चाहिये आभ्यन्तर की परिषदा का नाम समिता है 'तहेव सव्वं इत्यादि सब कथन पहिले के ही जैसा है 'णवरं अभितरियाए परिसाए दस देवसाहस्सीओ पण्णत्ताओ' यहाँ आभ्यन्तर परिषदा में दश हजार देव कहे गये है 'मज्झिमियाए परिसाए बारस देव साह - सीओ' मध्यपरिषद में १२ हजार देव कहे गये हैं और 'बाहिरियाए सौधर्म अनाथन अभाशे ४ छे. 'ईसाणस्स णं भते ! देविंदस्स देवरणो कति परिसाओ पण्णत्ताओ' हे भगवन् देवेन्द्र देवरान ईशाननी डेंटली परिषहामी उहेवामां आवे छे? या प्रश्नना उत्तरभां अनुश्री हे छे - 'गोयमा ! तओ परिसाओ पण्णत्ताओ' हे गौतम! शु परिषहाओ हेवामां आवे छे. 'तं जहा ' ? प्रमाणे छे. - 'समिता, चंडा जाता तहेव सव्वं समिता था અને જાતા આ સંબંધી વિશેષ થન શક્રેન્દ્રના પ્રકરણમાં જે પ્રમાણે છે, તેજ પ્રમાણેનું તે કથન અહિંયા પણ કહી લેવું જોઇએ. આભ્યન્તર પરિષદ્યાનુ नाभ सभिता छे. 'तहेव सव्वे' इत्यादि सधणु' ४थन पडेसाना उथन प्रमाणे ४ छे 'वरं अभितरियाए परिसाए दस देव साहस्सीओ पण्णत्ताओ' माल्यन्तर परिષદામાં અહીંયાં દસ डेन्जर देवा हेवामां आवे छे. 'मज्झिमियाए परिसाए बारस देवसाहस्सीओ' मध्य परिषहामा १२ માર હજાર દેવા કહેલા છે.
SR No.009337
Book TitleJivajivabhigamsutra Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhasilal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1974
Total Pages1588
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jivajivabhigam
File Size117 MB
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