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________________ औपपातिकसने कंटयं मलियकंटयं उद्धियकंटयं अकंटयं ओहयस निहयसतुं प्रत्यमित्र -दुर्बला बलहीना प्रत्यमित्रा =गायो यस्य स दुर्वलप्रत्यमित्र । अत पर सर्वागि विशेषगानि राज्यस्य, प्रशासदिति क्रियाया वा सन्ति, तस्माद् विशेषणाना नपुसकत्व द्वितीयैकवचनान्तत्व च। 'ओहयकटय' उपहतकण्टकम्--उपहता = मपत्तिहरणादिभि उपघात प्राप्ता कण्टका कण्टकवत् अन्त प्रविष्टतया वेदनाप्रदा तस्करादयो यस्मिन् राज्ये, शासने वा, तत् तथा। 'निहयझटय' निहतकण्टकम्निहता बन्धनादिमिर्दण्ड प्राप्ता कण्टका यत्र तत् 'मलियकटय ' मलितकण्टकम्मलिता प्रहारादिभिर्मथिता कण्टका यत्र तत्। 'उद्धियकटयं' उदृतकण्टकम्उद्धृता =निजजनपदाबहिष्कृता कण्टका यत्र तत् तथा । 'अझटय' अकण्टकम्धनबल एव मैन्यबल से मपन्न थे । (दुबलपचामित्ते) इनके जितने भी वैरी थे वे सब दुर्बल-बलहीन थे ।राज्य भी इनका (ओहयकटय निहयकटय मलियकटय उद्धियकटय) उपहत कटक-भीतर प्रविष्ट होकर चुभनेवाले काटोकी तरह पजाको पीडित करनेवाले तस्कर आदिकों से सर्वथा रहित था । निहतकटक इमलिये कि जितने भी राज्य में चोर आदि थे वे सब बधनद्वारा वरकर कारावास में बन्द कर दिये गये थे । मलितकटक इसलिये था कि राज्य मे जो भी चोर आदि थे वे सन प्रहारों द्वारा मथित कर दिये गये थे। उद्धतफटक इसलिये था कि राज्य के समस्त चोर आदि अपने जनपद से बाहर कर दिये गये थे। इसप्रकार इनमा राज्य ( अकटय ) तु (वलव) मा रात विशेष मणवान उता अर्थात् तनुस (शारीरि४ मण) धनमस तेभा सैन्यस्थी सपन्न उता (दुव्बलपच्चामित्ते) तमना । वेशातयामास सडीन उता तेभनुशन्य ५४ (ओहयकटयं नियकटय मलियकंटय उद्धियकटय)पडत४८४२४२मारता रही हुज्या ४२ तेवा घटना પ્રજાને દુખપીડા કરનાર તસ્કર આદિથી સર્વથા રહિત હતુ નિહતક ટકએટલા માટે કે રાજ્યમાં જે કઈચાર આદિ હતા તેઓ બધાને બ ધનથી બાધીને કારાવાસમા પુરી મુકેલા હતા મલિતક ટક એટલા માટે હતુ કે રાત્યમાં જે કોઈ ચેટર આદિ હતા તેઓ બધાને પ્રહારોથી મથિત કરવામા (મારવામા) આવ્યા હતા ઉદધૃતક ટ૮ એટલા માટે હતુ કે રાજ્યના તમામ ચોર આદિને પિતાના દેશથી બહાર કરી દેવામાં આવ્યા હતા આ પ્રકારે તેમનું રાજ્ય (अकटय) ये पायो । त२४२ माहि सामान ढीने सर्वथा नि४४
SR No.009334
Book TitleAuppatiksutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhasilal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1959
Total Pages868
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aupapatik
File Size26 MB
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