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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir पापना भागी को नहींजी, खावावाळा छे अनेक. सौ० ३ जीवतां जस लीधो नहींजी, मुवा पछी शी वात; चार घडीनुं चांदणुंजी, पछी अंधारी रात. सौ० ४ धन्य ते मोटा श्रावकोजी, आणंद ने कामदेव; घरनो बोजो छोडीनेजी, वीर प्रभुनी करे सेव. सौ० ५ बाप दादा चाल्या गयाजी रे, पूरा थया नहि काम; करवी देवनी वेठडीजी, शेखचल्लीना परिणाम. सौ०६ जो समजो तो शानमांजी, सद्गुरु आपे छे ज्ञान; जो सुख चाहो मोक्षनाजी, धर्मरत्न करो ध्यान. सौ० ७ वैराग्यनी सन्झाय मारुं मारुं म कर जीव तुं, ताहरु जगमां नहि कोय रे; आप स्वारथे सहु मिल्यां, हृदय विचारीने जोय रे. मा० १ दिन दिन आयु घटे ताहरु, जिम जल अंजलि होय रे; धर्मनी वेळा नाव्यो ढुंकडो, कवण गति ताहरी होय रे. मा० २ रमणी संगे राच्यो रमे, केम दीये बाउले बाथ रे; तन धन जोबन स्थिर नहीं, परभव नावे तुज साथ रे. मा० ३ एक घरे धवल मंगल हुवे, एक घरे रुवे बहु नार रे; एक रामा रमे कंतशुं, एक छंडे सकल शणगार रे. मा० ४ एक घरे सहु मली बेसतां, नित नित करता विलास रे; ३२ For Private And Personal Use Only
SR No.008932
Book TitleSadhubhai Samaya Sudharas Pije
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPadmaratnasagar
PublisherMahavir Jain Aradhana Kendra Koba
Publication Year2006
Total Pages196
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati & Discourse
File Size5 MB
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