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________________ ज्ज्ज तेरहवाँ अध्ययन : : मंडूक - दर्दुरज्ञात ( ९५ ) cleaning and cooking staff as well as pharmacists, chemists and other helpers employed in the hospital to look after all the needs of the patients. सूत्र १८ : तए णं णंदे मणियारसेट्ठी उत्तरिल्ले वणसंडे एगं महं अलंकारियसभं कारेइ, अणेगखंभसयसन्निविठ्ठे जाव पडिरूवं । तत्थ णं बहवे अलंकारियपुरिसा दिन्नभइ भत्त-वेयणा बहूणं समणाण य, अणाहाण य, गिलाणाण य, रोगियाण य, दुब्बलाण य अलंकारियकम्मं करेमाणा कमाणा विहरति । सूत्र १८ : अन्त में नन्द मणिकार ने उत्तर दिशा के वनखण्ड में एक विशाल अलंकार (शरीर की शोभा बढ़ाने का कार्य, आज की भाषा में ब्यूटीपार्लर) सभा बनवाई। इसका निर्माण भी पूर्व वर्णित रूप से हुआ था (सू. १४) । उसमें अनेक अलंकारिक पुरुष ( शरीर का शृंगार आदि कार्य करने वाले) वेतनादि पर नियुक्त किये गये थे। वे सभी प्रकार के रोगी, दुर्बल, अनाथ आदि अतिथियों का अलंकारकर्म करते थे । 18. In the end, Nand Manikaar constructed a huge beauty parlour in the northern garden. This was also beautifully constructed as the earlier ones. Many expert beauticians were employed there. They provided all the required services to the guests, patients, as well as the poor and needy ones. सूत्र १९ : तए णं तीए णंदाए पोक्खरिणीए बहवे सणाहा य, अणाहा य, पंथिया य, पहिया य, करोडिया य, कारिया य, तणाहारा य, पत्ताहारा य, कट्ठाहारा य अप्पेगइया ) हायंति, अप्पेगइया पाणियं पियंति, अप्पेगइया पाणियं संवहंति अप्पेगइया विसज्जियसेयजल्ल-मल्ल-परिस्सम- निद्द-खुप्पिवासा सुहंसुहेणं विहरति । रायगिहविणिग्गओ वि जत्थ बहुजणो, किं ते? जलरमण - विविह-मज्जण - कयलि-लयाघरयकुसुमसत्थरय - अणेगसउणगण-रुयरिभितसंकुलेसु सुहंसुहेणं अभिरममाणो अभिरममाणो विहरइ । सूत्र १९ : नंदा पुष्करिणी में अनेक सनाथ, अनाथ, पथिक, पांथिक, कोरटिका (कावड उठाने वाले), घसियारे, पत्ते उठाने वाले, लकड़हारे आदि आते थे। उनमें से कुछ स्नान करते, कुछ पानी पीते और कुछ पानी भर कर ले जाते थे। कोई शरीर का पसीना, मल, जल्ल, थकान, नींद, भूख, प्यास आदि का निवारण करते थे । क्या राजगृह से आये लोग भी नंदा पुष्करिणी का उपयोग करते थे ? हाँ, वे वहाँ जल से रमण करते थे; विविध प्रकार के स्नान करते थे; कदलीगृहों, लतागृहों, पुष्पशय्या आदि का आनन्द लेते थे; अनेक प्रकार के पक्षियों के मधुर स्वरों से गूँजती उस पुष्करिणी तथा चारों वनखण्डों में क्रीड़ा करते घूमते थे। 19. Many employed, unemployed, passersby, travellers, water carriers, grass cutters, leaf pickers, wood-cutters, and others came to the Nanda lake. CHAPTER-13: THE FROG Jain Education International For Private Personal Use Only (95) www.jainelibrary.org
SR No.007651
Book TitleAgam 06 Ang 06 Gnatadharma Sutra Part 02 Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmarmuni, Shreechand Surana, Surendra Bothra, Purushottamsingh Sardar
PublisherPadma Prakashan
Publication Year1997
Total Pages467
LanguagePrakrit, English, Hindi
ClassificationBook_English, Book_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, Conduct, & agam_gyatadharmkatha
File Size13 MB
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