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________________ शत्रुजय माहात्म्य. कुल थएला ते मरुदेवा माताने, तेणे पोतानां नाम पूर्वक नक्तिश्री नमस्कार को. ते वखते राजाउंना खामी तथा कमल सरखी आंखोवाला जरत महाराजे, मरनी ब्रांतिने धरनारा एवा पोतानां केशोथी तेणीनां चरणकमलोनुं प्रमार्जन कर्यु. ते वखते पोतानां नेत्रोनां आंसुजेने जरा बुडीने, तथा मननां खेदने बहार कहाडीने मरुदेवा माता जरतने कहेवा लाग्यां के, हे वत्स ! तुं जो ? मारो पुत्र, मने, तने अने बीजा पुत्रोने पण तजीने हरिणोनो साथी थएलो बे. वली ते दुधा, तृषा, टाढ, अने तडकानी पीडाथी क्षीण शरीरवालो थश्ने, हमेशां रातदहाडो वायुनी पेठे एक वनमांथी बीजा वनमां जमे बे. वली चंन सरखं शीतल, अने मोती तथा रत्नोथी जडेलु एवं तेनुं बत्र क्या ? अने दावानल सरखं प्रचंड आ सूर्यमंडल क्यां ? वली किन्नरीउनां गीतोनां ऊंकारवालुं मनोहर संगीत क्यां ? अने वननी अंदर चालवाथी संजलाता मछरोनां नणकारा क्या ? वली गजेंउपर चडीने तेमनुं नगरमां चालबुं क्यां ? अने कांकरा तथा पबरोवाला पर्वतोमा तेमनुं जमवू क्या ? जेने मृयु नथी आवतुं एवी हुँ, पुत्रनां श्रावी रीतनां फुःखनां समूहने सांजलवाथी पण मरती नथी, माटे लोकनिंदित एवा आ मारा जीवतरने धिक्कार !! वली राजसुखमां तथा जोगविलासमां रक्त 'थयेलो तुं, वनमां जमता मारा पुत्रनी कंई संजाल पण पुबतो नथी!! एवी रीते दीन वाणीवाली, तथा अश्रु सहित आंखोवाली पोतानी दादीने, जरा हसवाथी स्फुरायमान थएल डे होठ जेनां, एवा नरत महाराज कहेवा लाग्या के, हे माता! त्रण लोकनां खामी, धीर, अने गंजीर एवा पुत्रने तमो उत्पन्न करनारा बो, माटे एवी रीतर्नु कायरपणावालुं वचन तमो फरी फरीने बोलो नहीं. वली हे माता! जयंकर एवा श्रा संसाररुपी समुजमां शिला सरखा अमो तातनुं रक्षण करवाने केम समर्थ थ शकीयें ? तात तो मोदनी श्बावाला बे, अने ते क्षणिक संसार सुखने दूर करवाने पोते उत्तम तप तपे . वली इंसादिक देवो पण चाकरोनी पेठे तेमनी पासे हाजर रहे बे, एवा ते प्रजनुं माराजेवा केम रक्षण करी शके ? वली हे माता ! त्रणे लोकनां अधिपति एवा ते प्र. जुनी तमो ज्यारे लदमी जोशो,त्यारे तमोने तेमनां तपनुं सत्य फल ज. Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005362
Book TitleShatrunjaya Mahatmya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1899
Total Pages340
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size20 MB
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