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________________ २३२ शत्रुजय माहात्म्य. ते मारा जाश्नी साथे रणसंग्रामरूप दुःखदायक विरोध करीश नहीं; केम के सर्व देशोमा ढुंढतां पण सगो नाश मली शकतो नथी. वली माणसोने संपदा राज्य विगेरे सर्व जगोए मले बे, पण सगो ना तो लाग्यविना क्याए पण मली शकतो नथी. वली मन विनानुं जेम दान, चनुविनानुं जेम मुख, तथा मंत्रिविनानुं जेम राज्य तेम बंधुविना था जगत वृथा बे; वली जे धन बंधुनां उपकारमाटे यतुं नथी, ते धन वृथा , तथा जे जीवित कुःखीनां कु:खो मटाडवामाटे थतुं नथी, ते जीवित पण वृथा . वली जेना घरमां गोत्रीउनां घातथी मलेली लक्ष्मी विलास करे , ते घरनां स्वामिने पतित जाणवो, तथा तेनुं राजतेज पण शोजतुं नथी. वली “श्रा पराक्रमहीन " एम लोको जले मारी हांसी करे, पण हुं था नाना नाश्नी साथे युद्ध करीश नहीं. हवे पोतानी (बाहुबलिए करेली) निंदाथी अंतरमां गुस्से थएलो, तथा महा उत्साही सुषेण सेनापति, राजानी ते वाणी सांजलीने धीर श्रने गंजीर वाणीथी कदेवा लाग्यो के हे स्वामी! युगादीश प्रजुनां पुत्र एवा त. मोने दमा लाववी युक्तज डे, श्रने बंधु संबंधि अपूर्व स्नेह तमोने क्षमा करावे . पण हे स्वामी! आपनो था स्नेह एक हाथनी ताली सरखो , केम के,थापनापर तेनी दृष्टि शत्रुतावाली बे, अने तमो उलटा तेनापर स्नेह करो जो! वली राजाए तो पोतानी पाझानो जंग करनार एवा नाश्नी पण उपेक्षा करवी जोयें नहीं, केम के राजाउने तो श्राझाज ज्योत्स्नानी पेठे सर्व तेजनी करनारी. वली पोतानांज राज्यथी कृतार्थ थएला राजाउँजे दिग्जय करे , ते कंलोजथी नहीं, पण पोतानां पराक्रमनी वृद्धिमाटेज करे .वली श्रागामि कालमां पोतानुं हित श्छनार माणसे शत्रुनी उपेक्षा करवी नहीं, केम के ते क्षयरोगनी पेठे वृद्धि पामतो थको पो. तानेजहणे .माटे ज्यांसुधि तमारा सैन्यनी रजोनी श्रेणिथी था सूर्यमंडल वायुं नश्री, त्यांसुधि ते बाहुबलि कांखो थश्ने पोतानो देश बोडशे नहीं.वली ज्यांसुधि तमारा हाथीनां सैन्यनां नारथी था पृथ्वी नमी नथी, त्यांसुधि अहंकारथी उकत थएला ते बाहुबलिनी गरदन केम नमशे ? माटे हे स्वामी ! अपने या कार्यमा जरा पण विलंब करवो लायक नथी. जो मारा वचनपर श्रद्धा न होय, तो तमो था मंत्रि प्रमुखोने पण रा Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005362
Book TitleShatrunjaya Mahatmya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1899
Total Pages340
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size20 MB
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