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________________ ४८२ ] अनेकान्त [वर्ष ६ आधुनिक चम्पानगर जैनियोंका बड़ा तीर्थ-स्थान है । वहाँ के दो भव्य जैनमन्दिरोंको देखनेसे पता चलता है कि चम्पानगर बहुत प्राचीन समयसे ही जैनधर्मका केन्द्र रहा है। विद्वानोंके कथनानुसार जैनोंके बारहवें तीर्थङ्कर वासुपूज्यने यहीं जन्म लिया था। उनके अलावा, कहा जाता है कि जैनियोंके बारहवें तीर्थङ्कर महावीर भी कुछ वर्षों तक यहाँ रहे थे। बारहवें तीर्थङ्कर वासुपूज्यका मन्दिर नाथनगर मुहल्लेमें है, जो आज भी शहरसे अलग बसा हुआ है और जिसे देखकर मन्दिरकी प्राचीनताका सहज ही अनुमान किया जा सकता है। चम्पानगरमें जैनियोंका एक दूसरा मन्दिर भी है जिसके बारेमें कहा जाता है कि उसे महावीर तीर्थङ्करके प्रमुख शिष्य सुधर्मने बनवाया था । कहा जाता है कि जिस समय सुधर्म चम्पानगरीमें पधारे थे, वहाँ कोणिकका शासन था। राजा कोणिकने खले पाँव नगरके बाहर आकर सुधर्मका स्वागत किया था। चम्पा बहुत वैभव सम्पन्न नगर था । वह व्यापारका एक बड़ा केन्द्र था। वहाँ चान्दो सौदागर नामक प्रसिद्ध ल्यापारीके रहनेका वर्णन भी मिलता है। चम्पानगरका एक दूसरा मुख्य स्थान कर्णगढ़ है। स्थान इतनी ऊँचाईपर है कि उसे देखकर ही यह कहा जा सकता है कि प्राचीन समयमें वहाँ अवश्य ही किसी प्रतापी राजाका विशाल किला होगा। कुछ लोगोंका कहना है कि यह स्थान महाभारतके प्रसिद्ध सेनापति दानवीर कर्णका वासस्थान था । परन्तु, इतिहासके कुछ अन्य पंडितोंका कहना है कि चम्पानगरका यह कणगढ़ तथा मुंगेर जिलेका कण चम्पा नामक स्थान, कर्ण सुवर्णके राजा "कर्णसेन" के प्रतिष्ठापित हैं। इस बातका अभी तक निर्णय नहीं हो सका है। परन्तु, इतना अवश्य है कि यदि कर्णगढ़की खुदाई की जाय तो शायद प्राचीन बिहारके गौरवगाथाका एक नया अध्याय भी धरतीके गर्भसे प्रकाशमें लाया जा सकता है। आज कर्णगढ़में सरकारी पुलिस के रङ्गरूटोंको शिक्षा दी जाती है। कौन जाने, कभी वहाँ कर्णके रथके पहियों और घोड़ोंके टापोंकी आवाज़ बड़े-बड़े वीरोंके दिल न हिला देती हो। आज हमारे देशकी अवस्था बदल चुकी है। इसीलिये जरूरत इस बातकी है कि धरतीके अन्दर दबे हुए प्राचीन बिहारके इतिहासका उद्धार किया जाय । और यदि ऐसी कोई योजना बने तो उस समय चम्पानगरको भी भूलना न चाहिए। १ भगवान् महावीर जैनोंके चौबीसवें तीर्थङ्कर थे, तीन चातुर्मास रहे थे । सं०। २ इसका पुष्ट प्रमाण अपेक्षित है। सं०।। ३ भगवान् महावीर जब चम्पा पधारे तब कोणिक राज्यऋद्धि सहित वन्दना करने आया था, औप पातिक सूत्र में इस घटनाको यथावत् रूपसे अङ्कित किया गया है। सं० । ४ बिहार सरकारके वर्तमान शिक्षामन्त्री इसके लिए चेष्टा तो करते हैं परन्तु इन दिनों वे और और समस्याओंमें बुरी तरह उलझे हुए हैं । आपने पोस्टवार स्कीममें खोज की भी एक स्कीम रखी है। सरकारी काम ठहरा, देखें कब तक इस योजनाको क्रियात्मक रूप मिलता है। सं० । Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.527261
Book TitleAnekant 1948 11 12
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherJugalkishor Mukhtar
Publication Year1948
Total Pages88
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size3 MB
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