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________________ २०० वाजित्र वाजता, अबर गाजता | नरवधू नाचता, मनह रंगे || ५ || जिन गुण गावतां शुभ मन भावता । चिन्तामणि पार्श्वनाथ गीत मुगति फल पावता, चतुर चंग ॥ ६ ॥ सुगन्ध सारगद, पाप ते नवि रहे । मन वाछित लह, कुमुदचन्द्र करो जिन भारती ॥ ७ ॥ ( ३७ ) चिन्तामणि पार्श्वनाथ गीत बालो चन्द्रमुखी सखी टोली, पहेरो पटोलि चोलि रे । पूजिये पावन पास जिएसर, पीमीये सपत्ति बहोली रे ॥ १ ॥ सन्दर बासव रास कपूरे, वासित जलें जिन पूजीई । जप कोगे, पर यकी नवि बीहीजीए ॥ २ ॥ केरो राय रे । चन्दन केशर ने रसि चरमो त्रप्य भुवन " पाप तो संताप टले सहू, अत पूज करो प्रभु आगलि, नव निधि उदह रतन श्रति रुवड़ा, जिम लहीं निजधामें रे ॥ ४ ॥ त्रिम मनि वंछित थायेरे || ३ | पंच परम गुरु नामि रे । श्रानंद रे ॥ ५ ॥ बोली रे । जाई जूइ सरवर से यंत्रे, कुंद कमल मचकु दे रे । चम्पक तरणी चम्पक लिइ चरचो चरण कूरदालि बडावर व्यंजन, पोलिय घोर पासलडी पकवान चढ़ाबो, रची रचना वर उली रे ॥ ६ ॥ दीवडलो अजू वालो रे झाली. प्रारती उतारे । प्रारतडी भाजे जिम मननी पाप तिभिर सहु वारो रे ॥ ७ ॥ सुन्दरी ससिबदनी प्रभु चरणे कृष्णागरड खेबोरे । पावन धूम शिया परिमलना छूटिये करमति सेवोरे ॥ ८ ॥ सखिय चढावो सारी रे | दाडिम प्रति मनोहारी रे ॥ & ॥ 2 कमरख कदली फल सोनारी, रायण करमदा बदाम बीजोरा जल चन्दन प्रक्षत वर कुसुमें, परु दीवली घूपे रे । फल रखना सू प्ररक्ष करो सल्ली जिम न पड़ो भव कूपे रे ।। १० ।। इस अनूपम भाव धरीने, पूजता पास जिद रे । रोग शोग नवि ते श्रंगे, न हुई को दस्यु देव रे ।। ११ ।।
SR No.090103
Book TitleBhattarak Ratnakirti Evam Kumudchandra Vyaktitva Evam Kirtitva Parichay
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherMahavir Granth Academy Jaipur
Publication Year
Total Pages269
LanguageHindi
ClassificationSmruti_Granth, Biography, & Story
File Size4 MB
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