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________________ आनन्दोमि अने संक्षिप्त निवेदन -प्रधानसम्पादकीय शासनसम्राट, सर्वतन्त्र-स्वतन्त्र, सूरिचक्र-चक्रवर्ती, परमपूज्य 'श्रीविजयनेसूरीश्वरजी महाराजनां पट्टाम्बर-अम्बर-मणि, शास्त्रविशारद, कविरत्न, पीयूषपाणि, पूज्य आचार्य प्रवर श्रीविजयअमृतसूरीश्वरजी महा राजनां विनयेरत्न, मुनिवर्य श्रीपुण्यविजयजी महाराजनां चरणपद्मसेवक, व्याकरण-विशारद, विद्यावारिधि, सिद्धान्त-भारती, दर्शन-चिन्तामणि, कविशिरोमणि तथा ज्योतिर्विद् दिनमणि, परमपूज्य गुरुदेव स्व० श्रीमद् विजयधर्मधुरन्धरसूरीश्वरजी महाराजनी साहित्य-सम्पदा अतिमूल्यना रत्नोवडे अलंकृत छे. लगभग 70 रचनाओनी हारमाळा छपावीने प्रचार प्रसार पामी छे, पण हजु 40 जेटली पुस्तको अप्रकाशित छे. पूज्यश्रीनां स्वर्गप्रस्थान पछी ते पुस्तकोनं प्रकाशन थाय ते तेमनां सर्वे शिष्यो, भक्तो अने प्रशसकोने अभीष्ट होवा छतां विशेष प्रगति थई शकी नथी, ए चिन्तानी वात छेज. _छतां 'अकरणान्मन्दकरणं वरम्' ए लोक उक्तिने अनुसरी 'श्रीस्याद्वादामृत-प्रकाशन-मन्दिर, पालिताणाना ट्रस्टीओनी प्रेरणा अने पूज्य आचार्य, गणिवर्य तथा मुनिराजोना हार्दिक सहकारथी अमे कईंक करवा प्रयत्न करीए छीए. पहेला सं. 2040 मां 1- साहित्यशिक्षा-मंजरी, २-काव्य-विमर्श, ३-शब्द-वृत्तिमीमांसा अने,४--'शिशुहिता' व्याख्यासहित-अनुभव-सिद्ध-सारस्वत-स्तव-रूप चार पुस्तकोनुं सम्पुट तेमज 1 -सूक्तिसुधा-स्रोतस्वती- (जिन-स्तुति-चतुर्विंशतिका-अवचूरिसहित) P.P.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036425
Book TitleChar Granth Sangraha - Panch Parmeshthi Gunmala - Chaturvinshati Jinstutaya - Varnakram Sukti Panchashika - Gautam Swami Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaydharmdhurandharsuri
PublisherSyadvadamrut Prakashan Mandir
Publication Year1994
Total Pages145
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size98 MB
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