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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir घणां संघो पासे ज्ञानद्रव्य छ वली घणां भाविकोए संघो काढया छ, मन्दिर बनाव्या छे के प्रतिमाओ भरावी छे, उत्सवउजमणां कर्या छ-ते दरेक भाविको जो एक-एक प्राचीन ग्रन्थ प्रकाशित करवान राखे तो झाझा हाथ रलियामणा ए न्याये थोड़ी महेनते सेंकडो ग्रन्थोनुं प्रकाशन थई जाय. भण्डारो पण समृद्ध थई जाय. महेनत अमे करशुं अने उदारता तमे बतावजो. आ नम्र विनंति ध्यानमा लई आप आपनी शक्ति, भक्ति, भावना अने उल्लास मुजब आ कार्यमा सहकार आपवानुं नक्की करी नीचेना सरनामे जणावशो. * प्राचीन ग्रन्थ प्रकाशन योजना * c/o महेता मगनलाल चत्रभुज शाह मार्केट सामे, निशालफली जामनगर (सौराष्ट्र) आपना सद्भाव भर्या पत्रनी राह जोशुं. पूज्य आचार्यदेवादि पूज्यो ने नम्र विनंति छे के आपश्री आ कार्यमां मार्गदर्शन तथा कया कया ग्रन्थोनी प्रथम जरूर छे तथा कयां कयां ग्रन्थ आप सम्पादन करी आपी शको तेम छो-ते विगेरे जणाववा कृपा करशोजी. For Private and Personal Use Only
SR No.034248
Book TitleSwapna Pradip Shakun Saroddhar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri, Manikyasuri
PublisherHarshpushpamrut Jain Granthmala
Publication Year1982
Total Pages91
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size4 MB
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