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________________ अभ्ययात्स तु तं तूज] श्लोकपादसूची [अभ्यवर्तत संग्रामे अभ्यास तुसंपूर्ण 3. App. 13. 14 pr. अभ्ययात्समर राजन् 6.10.38. अभ्ययात्सल्सा तत्र 7.92.25 अभ्यासायधिस्तूर्ण 7.92.9. अभ्ययात्सुमावलम् 8.42.18%. अभ्ययात्सोवलं भूयः 7. 144.9. अभ्ययात्लीवल: कुदः 7. 114.1. अभ्यशप्रमेयात्मा 8.67. 12. अभ्ययादमरप्रख्यः 7. APP. ). 22pr. अभ्ययादलकाधिपम् 12.75.1. अभ्ययादरतश्रेतु . 19.1". अभ्ययादीमलेनं तु 7.103*.pr. अभ्याइभसं मुद्धा . 71.37. अभ्ययार्ज होणं 7.67. IF. अभ्यवाद्विमान्यमान् 4.55 15. अभ्ययान्तं च पाशायः 1. 89. 33. अभ्ययान्वयोण 7. 170.52. अभ्ययुर्देवदानवाः 2. Ap.21. G30 post. अभ्ययुबालवाततः 1.78.10. अभ्ययुप्राहाणाः स 5.15... . अभ्ययुतिर. सर्व !I. 13. 1. अभ्यमापकायुद्ध. 139*. 1 pr. अभ्ययुः कुरुपतमाः 7. 43.. अभ्ययुः कौरवान्सी 9.7. 11'. अभ्ययुः कौरवा राजन् 9. 10. 17. अभ्ययुः पातु 7. 11. 17. अभ्याः समर राज 8. 19.11. अभ्ययुः सदाशाली: 10.16.22. अभ्ययुः सहिताः पार्य 14. 86.:. अभ्यरक्षत संहारः 6. 47. 16. अभ्यरक्षत्परतरः15. 18. अभ्यरक्षन्त सहिता. 6.0.15 अभ्यरक्षन्तिासम् 6.7.16'. अभ्यरक्षमागह: 7. 1127". Ipr. अभ्ययनोमा शंकरी सुअचाचान 5.69.2". अभ्यर्चात सत्कार: 2. 101.3pr. अभ्यर्थयाम्मिन्दवाद 2. AP17B. 141 Pr. अभ्यर्चय ययातः 13. 12.64. अभ्यर्चयानाल तदा 5.68.38. अभ्यर्थ येत्क्षाहमयों ननाम् 14. App. 1. 572. अवचितं धूपायूपिांच 5. 138. 32. अभ्यर्चितः सपिनिः 18. APP. BA. 65pr. अभ्यर्चित पाण्डौः प्रामात् 9. 16. 189. अभ्यर्चितौ तदा वीरौ 2. 40. 160. अभ्यर्च्य च नराधिप 3. 83.64%. अभ्यर्च्य देवतास्तत्र 13. 26. 59". अभ्यर्च्य देवायतनं 13. App. 15.3110 pr. अभ्यर्च्य पुण्डरीकाक्षं 13. App. 12. 29 pr. अभ्यर्च्य ब्राह्मणान्पार्थः 1. 213. 44. अभ्यर्च्य विधिवत्तत्र 12. App. 19.77pr. अभ्यर्च्य विधिवद्विप्रान् 14. App. 4. 1375 pr. अभ्यर्च्य विविधै रलैः 3275.67. अभ्यर्च्य सह रैवतम् 1. 212. 6. अभ्यर्च्यः पुरुषोत्तमः 12. 326. 119. अभ्याननुपृच्छामि 13. 36.5. अभ्यर्थयेथा देवेश 3. 286. 13. अभ्यर्थयेमां सारथ्ये 4. 625*. 2 pr. अभ्यर्थितश्चाईति शुद्धभावः 5. App. 2. 37. अभ्यर्थिता च नारीभिः 4. App. 18. 15 pr. अभ्यर्दयञ्जिघांसन्तः 8. 33. 4. अभ्यर्दयदमेयात्मा 8. 35. 43. अभ्यर्दयद्वाणगणैः प्रसह्य 8. 1046*. 15. अभ्यर्दयन्महाबाहुः 7. 1050*. 1 pr. अभ्यर्दयन्महेष्वासं 8. 32. 72. अभ्यर्दयन्महेष्वासः 8. 432*.6 pr. अभ्यर्द यन्मार्गणैः सूनपुत्रः 8. 1067*. 8. अभ्यर्दितस्तु जि शुः 8. 19. 220. अभ्यर्दितस्तैरविकृत्तशस्त्रैः 8. 12. 63. अभ्यवर्तत कर्णस्तं 8. 35. 43. अभ्यवर्तत गाङ्गेयः 6. App. 4. 263 pr. अभ्यवर्तत तत्सैन्यं 6.86.. अभ्यवर्तत तारणे 7. 315d. अभ्यवर्नत तान्सर्वान् 6. 86. 38. अभ्यवर्तत दुर्जयः 7. 22. 16". अभ्यवर्तत दुर्जयो 6.68.5. अभ्यवर्तत दोगस्य 7. 145.2. अभ्यवर्तत पुत्ररते 7. 128. 136. अभ्यवर्तत युद्धाय 7. 135. 15. अभ्यवर्तत राधेयः 7. 107.4; 110.32. अभ्यवरीत वीर्यवान् 8. App. 43.71 post., 96 post.. 9. 18. 29", 64. अभ्यवर्तत वेगेन 7. 102.72603; 103. 180%; 141. 5903; 11.6. अभ्यवर्तत वै कण 8. 34. 15. अभ्यवर्तत संकुन्छः 7. 130. 14.9. 19. 1'. अभ्यवर्तत संग्रामे 7.08.1303121.4. - 181 -
SR No.032840
Book TitlePatrika Index of Mahabharata
Original Sutra AuthorN/A
AuthorParshuram Lakshman Vaidya
PublisherBhandarkar Oriental Research Institute
Publication Year1967
Total Pages808
LanguageEnglish
ClassificationCatalogue
File Size25 MB
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