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________________ गाथा वाउक्काओ तिविहो...॥४९॥ वाघाएण णियत्तो दिस्स...॥५१२॥ वासघरे अणुजत्ता... ॥ १०३ ॥ . विज्जा - तवप्पभावं....॥४९६॥ विज्जा - मंतपरूवण... T... 1142611 विज्झाउ त्ति ण दीसइ... ।।५८७ ।। विज्झाय मुम्मुरिंगालमेव...॥५८६ ॥ वितियमेयं कुरंगाणं...।।९७|| विमलीकयऽम्ह चक्खू.....।५२७॥ विसघातियपिसियासी मरइ ॥ २९८ ॥ विसरिसदंसणजुत्ता पवय....॥१६९॥ वीतितमेयं गयकुलाणं...॥९९॥ वेयण वेयावच्चे इरियट्ठाए...।।६९८ ।। वेविय परिसाडणया...॥६१८॥ वोलेंता ते व....॥१८६॥ संकाए चउभंगो दोसु... ॥५५८॥ संकामेउं कम्मं सिद्धं....॥२७९॥ संकिय-मक्खिय- निक्खित्त...॥५५७॥ संखडिकरणे काया...॥५४९॥ संखातीयाणि उ कंडगाणि ॥११९॥ संखेवपिंडियत्थो एवं... ॥८७॥ संघुद्दिट्ठे सोउं एति....॥२३०॥ संचारिमा उ चुल्ली....॥३२७॥ संजमठाणाणं कंडगाण...॥११७॥ संजयभद्दा तेणा आयंती.... ॥ ४०२ ॥ संजायत्ति भत्ते गोडिग... संजोयणा तु भावे...॥६७५॥ संजोयणाए दोसा जो...॥ ...॥६७४॥ ....॥२६९॥ संथरे सव्वमुज्झंति....॥४३०॥ संथार-पाय- दंडग...॥६९॥ ... परिशिष्ट - १ पृष्ठ | गाथा १४ संथारुत्तरचोलग पट्टा...॥३७॥ १२२ संदिस्त जो सुइ....॥२५९॥ २६ संवासो उ पसिद्धो...॥१३९॥ ११८ १२७ १४० १४० २५ १२७ ७३ संसज्जिमंमि दे ...॥ ६२९ ॥ संसज्जिमेहि वज्जं ...॥५७५॥ संसद्वेतर हत्थो मत्तो... संसत्तेण य दव्वेण... ॥६१२॥ . संसोहण संसमणं....॥४९३ ॥ सग्गाम - परग्गामे दुविहा....॥४६०॥ . सग्गाम - परग्गामे सदेस ॥ ३५७॥ ...... ४२ सग्गामे वि य दुविहं.... ॥ ३६० ॥ २५ सच्चित्तपुढविकाए सच्चित्तो...।। ५७८ ॥ . १६६ | सच्चित्तपुढविलित्तं लेलु....॥ ३७६ ॥ ... १४८ सच्चित्तमक्खियम्मी हत्थे ...। ...1146311 ४५ सच्चित्तमीसएसुं दुविहं...॥५७७॥ १३४ सच्चित्ते अच्चित्ते मीसग...॥ ५९४ ॥ ............ ६८ सच्चित्ते अच्चित्ते मीसग... ॥५९९ ॥ सच्चित्ते अच्चित्ते मीसग... ॥६४१ ॥ . सच्चित् अच्चित्ते मीसग...॥६६३ ॥ सच्चित्ते पव्वावण...॥६६॥ १३४ १३२ २९ १५० १३७ T...11εERII .............. 846 १४७ ११७ .......... ११० ८८ ८८ ..... १३८ ९१ १३७ १३८ १४३ .... १४४ १५३ १५८ १७ सज्झमसज्झं कज्जं ... सट्ठाण - परट्ठाणे दुविहं....॥३०१ ॥ .......... २३ ५५. ८१ सड्ढड्ढरत्त केसर...॥५१७॥ . २९ सङ्घस्स थोवदिवसेसु... ....।।२९३।।.......... ९७ सद्दाइएस साहू मुच्छं ॥२४६॥ ... ६५ समणकडाऽऽहाकम्मं समणाणं....॥२९२॥ १६१ समणे माहण-किवणे... ....1180611 [....॥ २८५॥............. १६१ सम्ममसम्मा किरिया....॥४७४॥ १०३ सयमेवालोएडं जूहवई ... ॥ ५५५ ॥ १६ । सवलय- घण-तणुवाया... ॥५०॥ १८१ पृष्ठ ११ ६२ ३४ ७० ७४ १२४ ७२ ५९ .... ७२ ११४ ११३ १३३ १४
SR No.032703
Book TitlePind Niryukti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaysundarsuri
PublisherDivyadarshan Trust
Publication Year2011
Total Pages226
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_pindniryukti
File Size30 MB
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