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________________ ३० भिक्खु दृष्टांत जद वैद बोल्यौ तौ ने ई काइ दीसै है ? जद ते बोल्यो-पंच सूझती हुवी कहिसी तौ देसूं। जद वैद जाण्यो बधाई आय चुकी। ज्यू कोइ रै श्रद्धा बैसाणी तिण ने कह्यौ तूं गुरु कर। तब ते कहै दोय च्यार जणांने पूछतूं तथा आगला गुरां ने पूछतूं। ते कहसी तो गुरु करतूं । जब जाण्यां इणरै श्रद्धा पकी बैठी नहीं। ८१. बड़ौ मूरख कोइ भेषधारयां ने छोड़ने साची श्रद्धा लीधी। गुरु कीधा । पिण उणां रो परचौ छुटौ नहीं। वार वार जायवो करै । जद स्वामीजी पूछ्यौ--यांरौ परचौ क्यूं राखै ? जद ते बोल्यौ-म्हारै आगलौ सनेह है। जद स्वामीजी बोल्या-किण ही ने मेर पकड़ ले गया। डेरौ खोस लीधौ । फाटका पिण दीधा । पछै घर रा मैहनत कर छुड़ाय ल्याया । केतले एक काळे मेला मैं भेळा थया । ओळख नै मेरां सू मिल्यो। लोकां पूछ्यौथारै कांइ सँहद ? जद बोल्यौ-म्हारै भाइजी रा हाथ रा फाटका लागा है । आ भाइजी रा हाथ री सहलाणी है। जद लोकां जाण्यौ ओ पूरौ मूरख है। ज्यूं यां कुगुरां रा जोग सूं तो खोटा मत मैं पड्यौ हौ। तिण ने उत्तम पुरुषां चोखो मारग पमायो । न ते बले कुगुरां सूं हेत राखै तो बड़ौ मूरख। ८२. रखे, नवो कजीयौ करोला सरियारी में स्वामीजी चोमासौ कीधौ । कपूरजी पोत्याबंध तिहां हुंतौ अनै पोत्याबंधां री वायां पिण हूंती। संवच्छरी आयां कपूरजी कह्यौभीखणजी ! वायां सूं बोलाचाली हुइ सो खमावा जाऊ । . जद स्वामीजी बोल्या-खमावा जावी छौ पिण रखै नवौ कजीयौ करौला। जद कपूरजी कह्यौ-नवौ कजीयौ क्यांने करू ? __ पछ बायां कन जायनै बोल्यौ-आपांरै खमतखामणां है। थे तो अजोगाई कीधी पिण म्हारै तो रागद्वेष राखणौ नहीं। जद बायां बोली-अजोगाई थे कीधी के म्है कीधी? इम आपस मै माहोमाहि झगड़ो घणो लागौ। पछ पाछौ आयो स्वामीजी ने कह्यो-भीषणजी ! कजियो तो अपूठी घणो हुवी। जंद स्वामीजी बोल्या-म्हे तो थाने पहिला इज कह्यौ यौ।
SR No.032435
Book TitleBhikkhu Drushtant
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJayacharya, Madhukarmuni
PublisherJain Vishva harati
Publication Year1994
Total Pages354
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size21 MB
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