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________________ शब्द । भोजनात्-भोजन से। अभ्यन्तरे-अन्दर। परिचारकः-नौकर। नगरात्-शहर से। ग्रामात्-गाँव से। गृहात्-घर से। कूपात्-कूएँ से। प्रायः-बहुधा। वाक्य 1. ब्रूहि, त्वं प्रातः सन्ध्यां करोषि न वा-बोल, तू सवेरे सन्ध्या करता है या नहीं ? 2. वद, त्वं तत् पुस्तकं पठसि न वा-बतला, तू वह पुस्तक पढ़ता है या नहीं ? 3. यद्, अहं त्वामाज्ञापयामि तत् कर्म शीघ्रं कुरु-मैं तुझे जो आज्ञा करता हूँ, उसे जल्दी कर। 4. नोचेत् त्वाम् अधुना एव ताडयिष्यामि-नहीं तो तुझे अभी पीढूँगा। 5. अहं भोजनात् पूर्वं किमपि' कर्म कर्तुं न इच्छामि-मैं भोजन के पूर्व कोई भी __ कार्य नहीं करना चाहता। 6. हे परिचारक ! कपाटमुद्घाटय अहमभ्यन्तरे आगन्तुमिच्छामि-अरे नौकर ! दरवाज़ा खोल, मैं अन्दर आना चाहता हूँ। 7. यद् अहं वदामि तत् न शृणोषि किम्-जो मैं कहता हूँ, वह तू नहीं सुनता है क्या ? 8. यदि त्वम् उच्चैः वदसि तदा अहं तव भाषणं श्रोतुं शक्नोमि-अगर तू ऊंचा बोलता है तो मैं तेरी बात सुन सकता हूँ। 9. सः नगरात् नगरं गच्छति-वह (एक) शहर से (दूसरे) शहर को जाता है। 10. सः ग्रामाद् बहिः गत्वा वनं गतः-वह गाँव से बाहर जाकर वन को गया। 11. सः मनुष्यः कूपात् जलमानयति'-वह आदमी कुएँ से जल लाता है। 12. सः इदानीमेव गृहात् बहिर्गतः-वह अभी घर से बाहर गया है। 13. सः पुनः कदा गृहमागमिष्यति'-वह फिर घर कब आएगा ? 14. सः प्रायः सायङ्कालमागमिष्यति'-वह शाम तक आएगा। 15. सुतः रक्षति-लड़का रक्षा करता है। 16. कुमारी तिष्ठति-लड़की ठहरती है। 17. अहमत्र लिखामि-मैं यहाँ लिखता हूँ। 18. मातामही नीचैः स्वपिति-नानी नीचे सोती है। 1. किम् अपि। 2. अहम् अभ्यन्तरे। 3. आगन्तुम् इच्छामि। 4. जलम् आनयति। 5. इदानीम् एव। 6. गृहम् आगमिष्यति। 7. सायंकालम् आगमिष्यति। 187
SR No.032413
Book TitleSanskrit Swayam Shikshak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShripad Damodar Satvalekar
PublisherRajpal and Sons
Publication Year2010
Total Pages366
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size16 MB
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