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________________ १२३ (८) – मनः पर्ययलब्धि, (१०) - गणधरलब्धि, (१२) - पदानुसारिलब्धि (११) -- पूर्वधरलब्धि, (१३) - क्षीरास्रवलब्धि, (१४) - घृतास्रवलब्धि, (१५) - मध्वास्स्रवलब्धि (१६) - वैक्रियलब्धि, ( १७ ) - आहारकलब्धि (१८ ) - लेश्यालब्धि - (तेजेालेश्यालब्धि, शीतललेश्यालब्धि), (१९) - अक्षीण महानसलब्धि, और इनके अतिरिक्त जङ्घाचरण आदिक सभीलब्धियाँ गौतमस्वामीके अधीन में सर्वदा रहती हैं ॥ ११ - १२-१३-१४-१५॥ (७) - अवधिलब्धि, (९) - केवलिलब्धि, ऋद्धिः सिद्धिः सुखं संपद, यशः कीर्तिर्जयस्तथा । विजयश्वास्य पाठेन, लभ्यते नात्र संययः ॥ १६ ॥
SR No.032168
Book TitleAdbhut Navsmaranam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhasilal Maharaj, Jayantilal Bhogilal Bhavsar
PublisherLakshmi Pustak Bhandar
Publication Year1977
Total Pages290
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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