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________________ मिथ्यात्व क्रियाऽधिकारः । न्यायवादी होसी ते तो सूत्र नो वचन उथापे नहीं । अते अयायवादी सूत्र नो for वचन उद्यापतो न शंके अने तेहना बड़ेरां ने पिग उथापने हाथी ने सम्यक्त्व थारे है। ओक विरुद्ध अर्थ करतां शंके नहीं । तेहनें परलोक में पिग सम्पादृष्टि पायी दुर्लभ है। डाहा होवे तो विचारि जोइजो १ इति ३ बोल सम्पूर्ण वी शाल पुत्र भगवान् ने बांधा । ते पाठ कहे छै । तर से सद्दालपुत्ते आजीविय उवासय इमीसे कहाए लख समाणे एवं खलु समणे भगवं महावीरे जाव विहरंति तं गच्छामि सम भगवं महावीरं वंदामो नमसामी जाव पज्जुवासामि एव संपेहति २ चा रहाए जाव पायव्छित्त शुद्धपवेसाई जाव अप महध्या भराणालंकीय सरीरे मरणस्स वरा परिगते सातो गिहातो पडिनिगच्छति २ त्ता पोलासपुर नगरं ममलं निगच्छति २ चा जेणेव सहस्सं अजाणे जेणेव समणे भगवं महाबारे तेणेव उवागछ २ ता । तितो याहीणं पयाही करेइ २ चंदइ २ गमंसइ २ जाब पज्जुवासइ । ( उपासक दशा अध्ययन ० तिवारे से० ले स० शेकडाल पुत्र च्या० आजीविका उपासक. ए० एह (भगवन्त ना पधारनेरी) कथा (वार्ता) ० सांभली ने बिचार करे छे. ए० ए ख० निश्वय. स० श्रमण. भगवान् महावीर पवारया दे तं ते माटे. ग० जाबू स० श्रमण भगवान् महावीर ने वांद्रेन नमस्कार करू. यावत् प० पर्युपासना (सेवा) करूं. ए० इम. सं० विचार करे. विचार करो में गहा० न्हांव्यो यावत् शुद्ध हुवो सुन्दर स्थान ने विषे प्रवेश करवा योग्य. यावत्. भारवन्त श्रनं बहुमूल्य वन्त बबाल डारे करी सुशोभित है शरीर जेहनों एहवो के म
SR No.032041
Book TitleBhram Vidhvansanam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJayacharya
PublisherIsarchand Bikaner
Publication Year1924
Total Pages524
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size40 MB
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