SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 44
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ है। उनके छोटे भाई श्रीवल्लभजी भंशाली का नाम पूरे देश में प्रामाणिक, देश हितचिंतक के रुप में जाना जाता है। निवेश बाजार में उनके विचारो को अलग रूप से देखा जाता है एवं श्री मंगलजी भंशाली समर्पित भाव से मानव सेवा के कार्य में लगातार आगे बढ़ रहे है, परिवार के धार्मिक एवं मानव सेवा के कार्य में लगे हुए है। यह श्री माणक सा. द्वारा दिए गए संस्कार ही है कि हम अपने परिवारो को आज साथ लेकर चल रहे है। हर कार्य मैं करता हुं और सोचता हूँ कि अगर आज माणक सा. होते तो मैं कैसै करता या उनका क्या आदेश होता उसी तरह मैं उस कार्य को करने की कोशिश करता हूँ। मैं सदैव ऋणी हुँ, रहुंगा आदरणीय माणक सा. का व भंशाली परिवार का... प्रणाम। अंत में चार पंक्तियों के साथ कलम को विराम, मीठी मधुर स्मृतियां आपकी, कभी नहीं मिट पाएगी। आपका व्यवहार, आपकी बात सदैव हमें याद आएगी। आपका विरल व्यक्तित्व प्रेरित सदा करते रहेगा। आपका आत्मविश्वास, हममें होलाला भरता रहेगा। मेरी अनुभूति के साथ विनम्र हृदय से माणक सा. को भावांजलि। रतलाम मुकेश जैन ०८.०१.२०१४
SR No.023318
Book TitleJain Sahityana Akshar Aradhako
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalti Shah
PublisherVirtattva Prakashak Mandal
Publication Year2016
Total Pages642
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size15 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy