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________________ आओ संस्कृत सीखें +16 पाठ4 तुदादि छठा गण 1. कर्तरि प्रयोग में शित् प्रत्यय लगने पर छठे गण के धातुओं को अ (श) विकरण प्रत्यय लगता है। उदा. तुद् + अ (श) + ति = तुदति, तुदते 2. श विकरण प्रत्यय अवित् शित् होने से ङित् समान है, अतः गुण नहीं हुआ। 3. धातु के इ वर्ण और उ वर्ण का स्वरादि प्रत्यय पर क्रमश: इय् और उव होता हैं। उदा. रि + अ + ति । रिय् + अ + ति = रियति धू + अ + ति । धुव् + अ + ति = धुवति 4. अ (श) तथा य (क्य) प्रत्यय पर, ऋ कारांत धातु के ऋ का रि होता है। उदा. मृ + अ + ते । म्रि + अ + ते म्रिय् + अ + ते = म्रियते । कर्मणि में – म्रियते । पृ का प्रियते । हृ का हियते । 5. शित् प्रत्यय आने पर मृ धातु आत्मनेपदी होता है। मृ का म्रियते । 6. ग्रह् गण 9, व्रश्च्, भ्रस्ज् और प्रच्छ् के स्वरसहित अंतस्था र का कित्-ङित् प्रत्यय पर ऋ होता है। उदा. व्रश्च् + अ + ति । वृश्च् + अ + ति = वृश्चति । भ्रस्ज का भृज्जति । प्रच्छ का पृच्छति । कर्मणि में - वृश्च्यते, भृज्ज्यते, पृच्छ्यते, गृह्यते 7. मुचादि (मुच्, सिच्, विद्, लुप्, लिप्, कृत्, खिद् तथा पिश्) धातुओं को अ (श) विकरण प्रत्यय पर स्वर के बाद न् जोड़ा जाता है। उदा. विद् + अ + ति । विन्द + अ + ति = विन्दति आदि 8. पद के अंत में न हो, ऐसे म् और न् का वर्गीय धुट व्यंजन पर, बाद में रहे व्यंजन के वर्ग का अंत्य अक्षर ही होता है। उदा. मुच् + अ + ति
SR No.023124
Book TitleAao Sanskrit Sikhe Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivlal Nemchand Shah, Vijayratnasensuri
PublisherDivya Sandesh Prakashan
Publication Year2011
Total Pages366
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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