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________________ . 62 आओ संस्कृत सीखें 4. बालकों को लड्डु पसंद हैं। . 5. बालक लड्डू चाहता है | 6. युद्ध में योद्धा लड़ते हैं। 7. राजा प्रधानों पर क्रोध करता है | हिन्दी में अनुवाद करों 1. धर्मः शरणमापदि । 2. वियति विद्योतते विद्युत् । 3. मरुता समुद्रः क्षुभ्यति । 4. वीराणां हि रणं मुदे । 5. कुम्भकारेण मृदो भाण्डानि व्यरच्यन्त | 6. कारणस्याऽनुरूपं कार्यं जगति दृश्यते । 7. शरदि न वर्षति गर्जति, वर्षति वर्षास नि:स्वनो मेघः । 8. उदारस्य तृणं वित्तं, शूरस्य मरणं तृणम् । विरक्तस्य तृणं भार्या, निःस्पृहस्य तृणं जगत् ।। धातु ग = गर्जना करना (गण 1,10 परस्मै) रुच् = पसंद पडना द्युत् = प्रकाशित होना (गण 1,परस्मै) (गण 1, आत्मनेपदी) वि + = चमकना दुह् = सेवा करना (गण 1, उभयपदी) दुह् = द्रोह करना (गण 4,परस्मैपदी) आ + = द्रा आश्रय लेना अभि + = द्रोह करना व्यंजनांत नाम आपद् = आपत्ति (स्त्री लिंग) युध = युद्ध (स्त्री.) जगत् = जगत् (नपुं.) योषित् = स्त्री (स्त्री.) मरु = पवन, देव (पुं.) विद्युत = बिजली (स्त्री.) मुद = हर्ष (स्त्री.) नियत् = आकाश (नपुं.) मृद = मिट्टी (स्त्री.) शरद = शरद ऋतु (स्त्री.) शब्द अनुरूप = समान (विशे.) निःस्वन = आवाज रहित (वि.) आतप = धूप (पुं.) भाण्ड = बर्तन (नपुं.) उदार = उदार (वि.) मरण = मृत्यु (नं.) कुम्भकार = कुम्हार (पु.) वर्षा = वर्षाऋतु (स्त्री) क्लान्त = थका हुआ (भूत कृदंत) वित्त = धन (नपुं.) छाया = छाया (स्त्री.) विरक्त = राग रहित (वि.) निःस्पृह = स्पृहा रहित (वि.) शूर = शूरवीर (पुं.)
SR No.023123
Book TitleAao Sanskrit Sikhe Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivlal Nemchand Shah, Vijayratnasensuri
PublisherDivya Sandesh Prakashan
Publication Year2011
Total Pages226
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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