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________________ हेमचन्द्र के अपभ्रंश सूत्रों की पृष्ठभूमि संस्कृत साहित्य का इतिहास-पृ० 4-डा० कीथ, अनु० डा० मंगलदेव शास्त्री-प्रकाशन, मोतीलाल बनारसीदास, वाराणसी। लिंग्विस्टिक इन्ट्रोडक्शन टू संस्कृत-पृ० 48-69-डॉ० बटेकृष्ण घोष-कलकत्ता, 19361 भारतीय आर्य भाषा और हिन्दी-पृ० 73-डा० सुनीति कुमार चाटुा । वही, (पृ. 75)। वेदान्नो वैदिकाः सिद्धालोकाच्च लौकिकाः-महाभाष्य-1/1/1 पस्पशाहिक । ___... मानुषीमिह संस्कृताम् 'द्विजातिरिव संस्कृताम' वाल्मीकि रामायण सुन्दर काण्ड-XXX, 17-18। फिलोसोफि ऑफ संस्कृत ग्रामर-पृ० 171 10. विल्सन फिइलोलोजिकल लेक्चर्स-पृ० 30। संस्कृत साहित्य का इतिहास-पृ० 4-डा० कीथ । 'अर्ध मात्रा लाघवेन पुत्रोत्सवं मन्यन्ते वैयाकरणाः । 13. महाभाष्य-अ० 1/4 पस्पशाहिक। 14. संस्कृत भाषा का इतिहास-पृ० 11-अनु० डा० मंगलदेव शास्त्री। 15. 'शवतिर्गतिकर्मा कम्बोजेष्वेव भाष्यते, विकारमस्यायेंषु भाषन्ते शव इति। दातिर्लवनार्ये प्राच्येषु दात्रमुदीच्येषु ।' 16. 'हम्मतिः सुराष्ट्रेषु रंहतिः प्राच्यमध्येषु गमिमेवत्वार्याः प्रयुञ्जते', महाभाष्य 1/1/1 भण्डारकर, JBRAS. XVI-273 और मैकडोनेल वैदिक ग्रामर पृ० 307 नं० 2। 18. द लिंग्विस्टिक स्पेकुलेसन्स ऑफ हिन्दूज--पृ० 272-कलकत्ता विश्वविद्यालय, 19331
SR No.023030
Book TitleHemchandra Ke Apbhramsa Sutro Ki Prushthabhumi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRamanath Pandey
PublisherParammitra Prakashan
Publication Year1999
Total Pages524
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size32 MB
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