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________________ • [३४] पढमपया ||१२|| पढमा हिगारे वंदे, जाव जिणे बीएड दवजिणे || इगचेश्य ग्वणजिणे, तय चत्थंमि नामजिणे ॥ ४३ ॥ तिहुआठवण - जिणे पुणे, पंचमए विहरमा जिए छडे ॥ सत्त मए सुनाएं, हमए सवसिद्धथुई ॥ ४४ ॥ तित्थाहिव वीरथुइ, नवमे दसमे य उज्जयंतथुई || अट्ठावयाइ इगदि सि, सुदिट्ठि सुरसमरणा चरिमे ॥ ४५ ॥ नव अहिगारा इह ललिअवित्थरा वित्तिमाइ अनुसारा ॥ तिरिए सुयपरं - परया, बीओ दसमो इगारसमो ॥ ४६ ॥ श्रावस्वयचुएणीए, जं जणियं सेसया जहिच्छाए | तेणं उज्र्जिताइवि, अहिगारा सुयमया चैव ॥ ४७ ॥ बी सुत्याई, त्यो पन्नियो तहिं चेत्र ॥ सक्कत्थयंते पढियो, दवारिहवसरि पयमत्थो ॥ ४८ ॥ असढाइन्नणवजं, गोत्थ वारिति मज्झत्था || यरणावि हु आए - ति वयओ सुबहु मन्नंति ॥ ४९ ॥ च वंदणिज जिएमुणि, सुयसिद्धा इह सुराश्य सरणिजा ||
SR No.022371
Book TitlePrakaran Ratna
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagardas Pragjibhai
PublisherNagardas Pragjibhai
Publication Year1932
Total Pages230
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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