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ओअल्लो पल्हत्थ-प्पकंप-गोवाड-लंबमाणेसु। ओरत्तो वि विदारिय-गविट्ठ-कुसुंभरत्तेसु
॥ १६५ ॥ ओहट्टो ओसरिए अवगुंठण-णीवियासुं च । गामेस-हरिय-आणा-बंधणखाएसु ओआओ ॥ १६६॥ ओहारो कच्छवए अंतरदीवम्मि भागे य। ओवियं आरोविय-रुण्ण-चाडु-मुक्केसु हरिए य ॥१६७ ॥ ओहित्थं च विसाए रहसम्मि वियारिए तह य । चंदण-सिलासु ओहंसो, ओसव्विअं असोह-सादेसु ॥ १६८ ॥ ओसिंघियम्मि चंदणघसणसिलाए य ओहरिसो। ओत्थरिओ अकंते अक्कममाणे य णायव्वो ॥१६९॥ ओसाअंतो जिम्भालसम्मि सीयंत-सवियणेसुं च । ओघसरो य अणत्थे घराण वारिप्पवाहे अ ॥ १७०॥ हेवामुह-काणेच्छिअ-आकिण्णेसु च ओसरिअं। ओदंपियं च ओरंपियं च अकंत-णढेसु
॥ १७१॥ ओअग्गिअं अहिभूए केसाईपुंजकरणे य । अण्णासत्ते तण्हापरे अ ओलेहडो पवुड्ढे य ॥ १७२ ।। चंदण-रइजोग्गे ओवसेरं, ओहसियं अंसुअ-धुएसु। ओसिक्खियं च गमणव्वाघाए अरइणिहिए य ॥ १७३॥ ओहरणं विणिवाडणं अत्थस्सारोवणं चेय। परओ ठियसंजोए उकार-ओकारविणिमओ होइ ॥१७४ ॥ इत्याचार्यश्रीहेमचन्द्रिविरचितायां देशीशब्दसंग्रह
प्रथमः स्वरवर्गः ॥
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