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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir आलोयणापरिणओ सम्म संपट्टिओ गुरुसगासे । जइ अंतरा वि कालं करिज्ज आराहओ तह वि ॥ २१ ॥ जाइ-कुल-विणय-उवसम-इंदियजय-नाण-दसणसमग्गो । अण्णणुतावी अमाई चरणजुया लोयगा भणिया ॥ २२॥ मुलुत्तरगुणविसयं निसेवियं जमिह रागदोसेहि । दप्पेण पमाएण व विहिणालोएज्ज तं सव्वं ॥ २३ ॥ पढमं काले विणए बहुमाणुवहाण तह अणिण्हवणे। वंजण-अत्थ-तदुभये अट्ठविहो नाणमायारो य ॥ २४॥ नाणपडणीय निण्हव सच्चासायण तहन्तरायं च । कुणमाणस्सइयारो पट्टियपुत्थाइपडणीयं ॥ २५ ॥ निस्संकिय निकंखिय निव्वितिगिच्छा अमूढदिट्ठी य । उववूह थिरीकरणे वच्छल्लपभावणे अट्ठ ॥ २६ ॥ चेइयसाहू सावय विण उववूह उचियकरणिज्जं । जं न कयं तं निदे मिच्छत्तं जं कयं तं च ॥ २७॥ बेइंदिया य जलुया सिमिया किमिया य हुंति पुंअरया । तेइंदिय मंकोडा जूवा मंकुणग उद्देही ॥ २८॥ चरिंदिय मच्छिय विच्छिया य मसया तहेव तिड्डाय । पंचिंदिय मंडुक्का पक्खी मूसा य सप्पा य ।। २९ ॥ अलिये अब्भक्खाणं दिट्ठीवंचणमदत्तदाणम्मि। मेहुणसुमिणासेवण कीडा अंगस्स संफासे ।। ३०॥ भत्तारअण्णपुरिसे केली गुझंगफासणा चेव । इत्थी पुरिसाणं पुण वीवाहण-पीइकरणाई ॥ ३१ ॥ तह य परिग्गहमाणे खित्ताईणं तु भंगमालोए । दिसिमाणे आणयणं अण्णस्स य पेसणं जं वा ॥३२॥ ७५ For Private And Personal Use Only
SR No.020963
Book TitleShastra Sandeshmala Part 22
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVinayrakshitvijay
PublisherShastra Sandesh Mala
Publication Year2009
Total Pages428
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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