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________________ ( ७७ ) maa - श्रीशर्जन तपचंद्रज्युसितज्ञानसे आ० ॥ ६ ॥शा रीरिकमहसेनसुश्रावदृढप्रहारजीत्पाज्युंज्ञानसेप्रा० ॥७॥ अंबिरिकवृषातीतत्रीतुंवर सर्वशीलसोने ज्यंज्ञानसे आ० ॥८॥ प्रतिराजजिनेंद्रतपशादि रत्नकरदेवेसन्नानसे आ० ॥ ९ ॥ नीलांबनप्रवेश प्रन्नुकं नमेजिनदासअतहीमानसें आ० इतिस० ॥ जलचंदनपुष्पधूपनै रथदीपाक्षतकैर्निवेद्यवस्त्रैः ॥ उपचारवरैर्वयंजिनेन्द्रान् रुचिरैरद्यमुदायजामहे ॥ शथ अठावीसमीपूजा लिख्यते॥दोहा॥ मोहनी महाविकारलजे जासण्ठावीसभेद सिन्नरकोडाको डिनी स्थितियहोवतखेद ॥ १ ॥ पुष्करपश्चिमऐरवत अतीतकालमकार थयातेजिनवांदीये लैयेनव जलपार ॥ २ ॥ राग ॥ नक्तिहृदयमांधरजा अंतर वेरीनेवारजोरे तारजोदीनदयाल ॥ एदेसी ॥ सेव कपेंकरुणाकरोरे तिमरअज्ञानदूरेहरोरे दीजीयेसु जमतिज्ञान ॥ टेक ॥ अनंतज्ञानकतेप्रभुरे कहान दीयोमोयेज्ञान अंतलोनीदीसोप्रनुरे काहहोवोकृ पणश्जान होसाहेब० ॥ १ ॥ कुंभेसमुद्रखुटेनईरे मुंगीखायें मोंगु न थाये चाचखंत्रखुटेनइरे तिम आपन शोबुं न थाये हो० ॥ २ ॥ कहाबकरीस करोतुमेरे रीसेननिपजेसार अमद्रव्यशमबिनौर कुंरे नईपाचे ज्युचक्रीपार हो० ॥३॥ तुमयोग्य ज्ञानप्रदेसबरे लोकमाअनंतश्पार नक्तिमत्नावेतपा मसोरे तरशोन्नवसंसार हो०॥४॥ सुसंन्नवपच्छा
SR No.020913
Book TitleViveksar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1878
Total Pages237
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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