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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailashsagarsuri Gyanmandir ६३२ तत्त्वनिर्णयप्रासादहुणा ४९, केकया ५०, हृणा ५१, रोमका ५२, रुक्खा ५३, मरुका ५४, इत्यादि अनार्यदेशके वासी मनुष्योंके नाम, प्रश्नव्याकरण सूत्रमें लिखे हैं. । और शक १, यवन २, शवर ३, बर्बर ४, काय ५, मुरुंड ६, दुगोण ७, पक्कण ८, अक्खाग ९, हृण १०, रोमस ११, पारस १२, खस १३, खासिक १४, दुबिल १५, यल १६, बोस १७, बोकस १८, भिलिंद १९, पुलिंद २०, क्रौंच २१, भ्रमर २२, रूका २३, क्रौंचाक २४, चीन २५, चंचूक २६, मालंग २७, दमिल २८, कुलक्षय २९, केकय ३०, किरात ३१, हयमुख ३२, खरमुख ३३, तुरगमुख ३४, मेंढकमुख ३५, हयकर्ण ३६, गजकर्ण ३७, इत्यादि अनार्यदेशोंके नाम, सूत्रकृतांगकी नियुक्तिमें कहे हैं.। इत्यादि एकतीस सहल नवसौ साढेचुहत्तर ( ३१९७४॥) अनार्य देश जिसमें वसते हैं. और साढे पच्चीस (२५॥) आर्यदेश हैं, उनके नाम प्रज्ञापना सूत्रसें लिखते हैं. । राजगृहनगर-मगधजनपद १, अंगदेश-चंपानगरी २, बंगदेश-ताम्रलिप्तीनगरी ३, कलिंगदेश-कांचनपुरनगर ४, काशीदेश-वाणारसीनगरी ५, कोशलदेश-साकेतपुर अपर नाम अयोध्यानगर ६, कुरुदेश-गजपुर ( हस्तिनापुर ) नगर ७, कुशावर्त्तदेश-सौरिकपुरनगर ८, पंचालदेश-कांपिलपुरनगर ९, जंगलदेशअहिछत्तानगरी १०, सुराष्ट्रदेश-द्वारावती (द्वारिका) नगरी ११, विदेहदेश-मिथिलानगरी १२, वत्सदेश-कौशांबीनगरी १३, शांडिल्यदेशनंदिपुरनगर १४, मलयदेश-भदिलपुरनगर १५, वच्छदेश-वैराटनगर १६, वरणदेश-अच्छापुरीनगरी १७, दशाणदेश-मृत्तिकावतीनगरी १८, चेदिदेश-शौक्तिकावतीनगरी १९, सिंधुदेश-वीतभयनगर २०, सौवीरदेश-मथुरानगरी २१, सूरसेनदेश-पापानगरी २२, भंगदेश-मासपुरिवहानगरी २३, कुणालदेश-श्रावस्तीनगरी २४, लाढदेश-कोटिवर्षनगर २५, श्वेतंबिकानगरी केकय आधा(०॥) देश, येह साढे पच्चीस (२५॥) आर्यदेश हैं. क्योंकि, इन देशोंमेंही जिन-तीर्थंकर, चक्रवर्ती, बलदेव, वासुदेवादि आर्य-श्रेष्ठ पुरुषोंका जन्म होता है, इसवास्ते इनको आर्यदेश कहते हैं. येह सर्व आर्यदेश विंध्याचल, और हिमालयके वीचमें हैं, हैम, अमरा For Private And Personal
SR No.020811
Book TitleTattva Nirnayprasad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVallabhvijay
PublisherAmarchand P Parmar
Publication Year1902
Total Pages863
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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