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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir (८०) च्छेरय निसिविप्फुरंत, सच्छंद सूरिमयतिमिरं ॥ सूरेणव सूरिजि सरेण, हयमहिअदोसेण ॥ ११ ॥ सुकइत्तपत्तकित्ती, पयडिअगुत्ती पसंतसुहमुत्ती ॥ पहयपरवाइदित्ती, जिणचंदजईसरो मंती ॥ १२ ॥ पयडिअ नवंग सुतत्थ, रयणुकोसो पणासिअ पओसो ॥ भवभीष भविअ जणमण, कयसंतोसो विगयदोसो ॥ १३ ॥ जुगपवरागम सार, प्परूवणा करणबंधुरोधणि ॥ सिरिअभयदेवसूरी, मुणिपवरो परमपसमधरो ॥ १४ ॥ कयसावयसंतासो, हरिवसारंगभग्ग संदेहो ॥ गयसमयदप्पदलणो, आसाइअपवरकवरसो ॥ १५ ॥ भीमभवकाणणम्मिअ, दंसिअ गुरुवयणरयणसंदेहो ॥ नीसेससत्त गुरुओ, सूरीजिणवल्लहो जयइ ॥१६॥ उवरहिअ सञ्चरणो, चउरणुओगप्पहाण सञ्चरणो ॥ असम मयरायमहणो, उड्डाहो सहइ जस्स करो ॥ १७ ॥ दंसिअ निम्मल निचल, दंतगणो गणिअ सावओत्थ भओ ॥ गुरुगिरिगुरुओ सरहिव, मूरिजिणवल्लहो होत्था ॥ १८ ॥ जुगपवरागम पीऊसपाणि, पीणियमणाकया भवा ॥ जेण जिणवल्लहेणं, गुरुणा तं सवहा वंदे ॥१९॥ विप्फुरिअपवरपवयण, सिरोमणी बूढदुबहखमोया ॥ जो सेसाणं सेसुब, सहइ सत्ताण ताणकरो ॥२०॥ सच्चरिआण महीणं, सुगुरूणं पारतंत मुंबहइ ॥ जयइजिणदत्तसूरी, सिरिनिलओ पणय मुणितिलओ ॥२१॥ इति श्रीगुरुपारतंत्र्यनामक पंचमस्मरणम् ॥५॥ ॥ सिग्घमवहरउ विग्धं, जिणवीराणाणुगामिसंघस्स ॥ सिरि पासजिणो थंभण, पुरडिओ निहिआनिहो ॥१॥ गोयमसुहम्म पमुहा, गणवइणो विहिअ भवसत्तसुहा ॥ सिरिवद्धमाणजिणतित्थ, सुत्थयंते कुणंतु सया ॥२॥ सक्काइणो सुराजे, जिणवेयावञ्चका. For Private And Personal Use Only
SR No.020721
Book TitleShravak Nitya Krutya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJinkrupachandrasuri
PublisherNirnaysagar Press
Publication Year1923
Total Pages178
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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