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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir उत्तर क्रिया करनेका विधान ७३ ॥ (१) भूमिशुद्धि ॥ ॐ भूरसी भूतधात्री सर्वभूतहिते भूमि भुद्धिं कुरु कुरु नमः । यावदहं पूजा करिष्ये ताव सर्वजनानां विघ्नान विनाश विनाश सिरिभव सिरिभव स्वाहा। इस मंत्र को बोलकर भूमिशुद्धिके लिये पृथ्वी पर वासक्षेप डालना चाहिए। ॥(२) अंगन्यास ॥ ॥ हाँ हृदय, ही कण्ठ, हूँ तालु, हाँ भ्रूमध्य, हूँ ब्रह्मरन्ध्रेशु॥ उपरोक्त मंत्र बोलते समय हृदय, कण्ठ, तालु आदि के हाथ लगाते जाना और क्रमवार बोलना। ॥ (३) सकलीकरण ॥ ॥ति, पीतवर्ण जानुनो, प, स्फटिक वर्णनाभौ, ॐ रक्तवर्ण हृदय, स्वा, नीलवर्ण मुखै, हाः मृगमदवर्ण भालै ॥ उपर बताये अनुसार बोलते जाना और जानु, नाभि, हृदय, मुख, और भाल पर हाथ लगाते जाना बादमें उलटा जाप इस तरह करना। ॥हाः मृगमदवर्णभालै, स्वा नीलवर्णमुखै, ॐ रक्तवर्ण हृदये, पः स्फटिकवर्णनाभौ, क्षि पीतवर्णजानुनो इस तरह For Private and Personal Use Only
SR No.020611
Book TitleRushimandal Stotra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandanmal Nagori
PublisherSadgun Prasarak Mitra Mandal
Publication Year1940
Total Pages111
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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