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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir सुदर्शितटीका अ० २ ० ५-६ नास्तिकवादिमतनिरूपणम् १५३ शब्दादिषु ‘बट्टेह' वर्तध्वं शब्दादीन सर्व विषयान् यथेच्छमुपभुध्वम् , 'नत्थि' नास्ति 'काइ ' काचिदपि 'किरिया अकिरिया वा ' क्रिया = तत्र - सक्रिया शास्त्रोक्तानुष्ठानरूपा । अक्रिया असत्क्रिया सावधकर्मानुष्ठानरूपा, आस्तिक कल्पितेनाप्रमाणत्वात् , एवं 'नथिकवादिणो' नास्तिकवादिनः 'वामलोगवादी' वामलोकवादिनश्च भणन्ति कथयन्ति ॥ मू० ५॥ पुनरपि तानेवाह-'इमंपि' इत्यादि___ मूलम्-इमंपि बिइयं कुदंसणं असम्भाववाइणो पण्णवेति मूढा संभूओ अंडकाओ लोगो सयंभुणा सयं च निम्मिओएवं एयं अलियं पयं पंति ॥ सू०६॥ ____टोकाइदमनुपदवक्ष्यमाणमपि 'विइयं ' द्वितीयं 'कुदंसणं ' कुदर्शनं = कुत्सितं दर्शनं-असत्यसिद्धान्तम् ' असब्भावबाइणो' असद्भाववादिनः = असन्तो भावाः येषां ते तथा ते च ते वादिनस्तथा मूढाः ' पणवेति' प्रज्ञापयन्ति यत् शब्दादि सब विषयों में ( वढेह ) इच्छानुसार प्रवृत्ति करते रहना चाहिये। ( नत्थि काइ किरिया अकिरिया वा ) शास्त्रोक्तअनुष्ठान रूप न कोई क्रिया-सस्क्रिया है और न सावद्यकर्मानुष्टान रूप कोई अक्रियाअसक्रिया है तो केवल आस्तिकवादियों की कोरी कल्पनाएँ हैं। इनमें वास्तविकता कुछ भी नहीं है । ( नत्थियवाइणो वामलोगवाई ) नास्तिकवादी और वामलोकवादी ( एवं भणंति ) इस प्रकार कहते हैं वह सब कथन मृपावादरूप है ।।सू. ५॥ फिर कहते है-'इमं पि बिइयं ' इत्यादि। टीकार्थ-अनुपद वक्ष्यमाण ( इमंपि विइयं ) यह दूसरा कुदर्शन भी कि जिसे ( असल्भाववाइणो ) असद्भाववादी तथा ( मूढा ) मूढजन "वदेह "छानुसार प्रवृत्ति ४ा ४२वी . “ नत्थि काइकिरिया अकिरिया वा” शास्त्रोत मनुठान३५ डिया सत् छिया नथी, सावधानुष्ठान રૂપ કોઈ અક્રિયા અસલ્કિયા નથી, તે તો કેવળ આસ્તિકવાદીઓની ખાલી ક૫नाम छे. तेम पाय वास्तविश्ता नथी” "नस्थियवाइणो वाम लोगवाई” नास्तिवाही भने पामतावादी एवं भणति" ते २५ प्रमाणे ४ छ, તે તેમનું કથન મૃષાવાદ છે કે સૂ–પ ! 4जीछ-" इमं पि बिइयं "त्या. टी-नीय प्रभानु "इमं पि बिइय" मान्नु सुशन 32 “असम्भाववाइणो" असहनावाही तथा “मूढा" भूढ all " पण्णवेति' ५३पित ४२ प्र २५ For Private And Personal Use Only
SR No.020574
Book TitlePrashnavyakaran Sutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalalji Maharaj
PublisherJain Shastroddhar Samiti
Publication Year1962
Total Pages1002
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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