SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 230
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www. kobatirth.org मेघदूतम् 2. चण्डी - दुर्गा, पार्वती, पार्वती का विशेषण । 3. भवानी [भव + ङीष् आनुक] पार्वती का नाम, पुण्यं यायास्त्रिभुवनगुरोर्धामचण्डीश्वरस्य । पू० मे० 37 तीनों लोकों के स्वामी और चंडी के पति महाकाल के पवित्र मंदिर की ओर चले जाना। Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir जनकतनया . पार्वती । शान्तोद्वेगस्तिमितनयनं दृष्टभक्तिर्भवान्या । पू० मे० 40 पार्वतीजी एकटक होकर शिवजी में तुम्हारी इतनी भक्ति देखती रह जाएँगी । भवानी पुत्र प्रेम्णा कुवलयदल प्रापि कर्णे करोति । पू० मे० 48 पार्वतीजी, पुत्र पर प्रेम, दिखाने के लिए अपने उन कानों पर सजा लेती हैं, जिन पर वे कमल की पंखड़ी सजाया करती थीं । चन्द्रिका - 1. चन्द्रपाद [ चन्द् + णिच् + रक् + पादः] चंद्रकिरण, चाँदनी । त्वत्संरोधापगमविशदैश्चन्द्रपादैर्निशीथे । उ० मे० 9 वहाँ आधी रात के समय, खुली चाँदनी में। 2. चन्द्रिका - [ चन्द्र + ठन् + यप्] चाँदनी, ज्योत्स्ना । बाह्योद्यानस्थितहरशिरश्चन्द्रिका धौत हर्म्या । पू० मे० 7 भवनों में, बस्ती के बाहर वाले उद्यान में बनी हुई शिवजी की मूर्ति के सिर पर जड़ी हुई चन्द्रिका से सदा उजाला रहता है। निर्वेक्ष्यावः परिणतशरच्चन्द्रिकासु क्षपासु । उ0 मे० 53 मन की सब साधें सुहावनी चाँदनी रात में पूरी कर ही डालेंगे। 1. जनकतनया [ जनक + तनया] सीता । 695 3. ज्योत्सना - [ ज्योतिरस्ति ऽस्याम् - ज्योतिस् + न, उपधालोपः ] चंद्रमा का प्रकाश, चाँदनी । नित्य ज्योत्सना: प्रतिहततमोवृत्तिरम्याः प्रदोषाः । उ० मे० 3 वहाँ की रातें सदा चाँदनी रहने से बड़ी उजली और मन भावनी होती हैं। For Private And Personal Use Only
SR No.020427
Book TitleKalidas Paryay Kosh Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTribhuvannath Shukl
PublisherPratibha Prakashan
Publication Year2008
Total Pages441
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size15 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy