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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir कालिदास पर्याय कोश 1. आमय :-[आ+मी+करणेअच्-तारा०, अमिन वा अय्यते इति आमय:] रोग, 'बीमारी, मनोव्यथा। आमयस्तु रतिराग संभवो दक्षशाप इव चन्द्रमक्षिणोत्।19/48 जैसे दक्ष के शाप से चन्द्रमा को क्षय रोग हो गया था, वैसे ही अधिक भोग-विलास करने से उसे भी क्षयरोग हो गया और धीरे-धीरे बढ़ने लगा। 2. गद :-[गद्+अच्] रोग, बीमारी। जनपदे न गदः पदमादधावभिभवः कुत एव सपत्नजः। 9/4 रोग भी उनके राज्य की सीमा में पैर न रख सके, फिर शत्रुओं के आक्रमण की संभावना ही कहाँ थी। इन्द्रादृष्टि नियमित गदोद्रेक वृत्तिर्यमोऽभूत्। 17/81 इन्द्र ने उनके साम्राज्य पर वर्षा की, यमराज ने रोगों का बढ़ना रोका वैद्ययत्न परिभाविनं गदं न प्रदीप इव वायुमत्य गात्। 19/53 जैसे वायु के आगे दीपक का कुछ भी वश नहीं चलता, वैसे ही राजा भी वैद्य के प्रयत्न से भी रोग से नहीं बचाया जा सका। 3. रुजा :-[रुज्+टाप्] बीमारी, व्याधि, रोग। इत्यदर्शित रुजोऽस्य मंत्रिणः शश्वद्चुरघशंकिनीः प्रजाः। 19/52 जब प्रजा पूछती थी कि राजा को कोई भयानक रोग तो नहीं है, तो मंत्री लोग प्रजा से राजा के रोग की बात छिपा रहे थे। 4. रोग :-[रुज्+घञ्] रुजा, बीमारी, व्याधि, मनोव्यथा। रोगशांतिमपदिश्य मंत्रिणः संभृते शिखिनि गूढमादधुः। 19/54 मंत्रियों ने रोग शांति के बहाने से शव को चुपचाप जलती अग्नि में रख दिया कि कहीं बाहर ले जाने से यह रोग प्रजा में न फैल जाय। गर्भ 1. कुक्षि :-[कुष्+क्सि] पेट, गर्भाशय, गर्भ। विभक्तात्मा विभुस्तासामेकः कुक्षिष्वनेकधा। 10/65 यद्यपि विष्णु का एक ही रूप है, तो भी वे तीनों रानियों के गर्भो में अलग-अलग निवास कर रहे थे। For Private And Personal Use Only
SR No.020426
Book TitleKalidas Paryay Kosh Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTribhuvannath Shukl
PublisherPratibha Prakashan
Publication Year2008
Total Pages487
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size18 MB
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