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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org सीह -- सरस । वंश | "जन, धन, मन, सीसौदिया, सीसौदिया- नरेस ". सीह - संज्ञा, स्त्री० दे० (सं० साधु) गंध, महक, सुगंधि । * संज्ञा, पु० दे० (सं० सिंह ) सिंह १७७६ सुंडी - संज्ञा, पु० दे० (हि० सं० अंडिन्) हाथी । सुंद - संज्ञा, पु० (सं०) निसुंद कासुत तथा सुंदका भाई एक दैय | सीहगोस - संज्ञा, पु० दे० यौ० ( फा० सियाह + गोश) काले कानों वाला एक अंतु । सुं | - प्रत्य० ६० ( हि० से ) सों, से, सूँ ( प्रा० ) करण कारक का चिह्न | सुँघनी - संज्ञा, स्त्री० (हि० सँधना ) सँघनी, नस्य, हुलास, मरज़रोशन, तंबाकू का चूर्ण सूँघा जाता है । सुँघाना- - स० क्रि० दे० (हि० घना ) सुँत्रावन (०), सूंघने की क्रिया कराना, वाघाण कराना । प्रे० रूप-स -सुत्रवाना | सुंडभुलुंड- संज्ञा, पु० दे० (सं० शुड़-भुशुंडि ) सुंडाल - संज्ञा, पु० दे० (हि० सँड ) शुंडाल, हाथी । 1 सूँड़ रूपी अस्त्र वाला हाथी । संडा - संज्ञा, स्री० दे० (हि० सँड़) सूँड, सुटा – संज्ञा, पु० दे० (सं० शुक्र) शुक्र, शुंड (सं०) । सुग्गा, तोता, सुश्रा, सुवा, सुगना । सुमन - संज्ञा, पु० दे० ( सं० सुत) सुत, पुत्र, बेटा, लड़का, सुवन । "अंजिनि-सुचन पवन सुत नामा -- इ० चा० । सुनजद संज्ञा, पु० (दे०) सोनजई । सुचना * - अ० क्रि० दे० ( हि० सुश्चन ) उगना या उत्पन्न होना, उदय होना । संज्ञा, पु० दे० (सं० शुत्रा ) सुधा, सुवा, तोता, सुग्गा, सुगना । सुंदर - वि० (सं०) रूपवान, मनोहर, बढ़िया, अच्छा, मनोरम, ख़ूबसूरत | "दुइ तपसी तपसी बनाये | सुंदर सुंदर सुंदरि लाये" - स्फु० । स्त्री० - सुंदरी । सुंदरता - संज्ञा, स्त्री० (सं०) सौंदर्य, खूबसूरती, मनोहरता । " सुंदरता कहँ सुंदर करई" - रामा० । सुनामी सूरत स्त्री, त्रिपुर सुंदरी देवी, एक योगिनी, सगण और एक गुरु वर्ण वाला एक सवैया छंद का एक भेद, न, भ, भ, र (ग) वाला एक वर्णिक वृत, द्रुतविलंबित। " द्रुत विलंवित माह नभौ भरौ ' - ( पिं० ) । २३ वर्णों का एक वर्णिक छंद, (वृत्त) | “ लखै सुंदरी क्यों दरी को विहारी' रामा० । संघावर - संज्ञा, स्त्री० (दे०) सोंधापन । संवा-संज्ञा, पु० (दे०) स्पंज, इस्पुंज, तोप या बंदूक की गम नलिका को ठंडा करने को गीला कपड़ा, पुचारा ( प्रा० ) । सु-उ० (सं०) शब्दों के पूर्व लगकर सुंदर अच्छा श्रेष्ट, उत्तम श्रादि का अर्थ देता है, जैसे - सुकुल, सुशील | वि० - बढ़िया सुंदर, 1 अच्छा श्रेष्ठ, उत्तम, भला, शुभ । ग्रव्य ० दे० ( सं० सह ) कारण अपादान और संबन्ध का चिह्न | सर्व ० ० (सं० सः ) सो, वह । | सुंदरताई - संज्ञा, स्त्री० दे० (सं० सुंदरता ) सुंदरता, सौंदर्य्य । " बाजहिपन श्रति सुंदरताई" - स्फु० 1 (i सुंदराई -संज्ञा, स्त्री० दे० ( सं० सुंदरता ) सुंदरता, खूबसूरती । सहज सुंदराई पर राई नून चारती" दास० । सुंदरी - संज्ञा, त्रो० (सं०) सुंदर या खूब - Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir मुआ - संज्ञा, पु० दे० (सं० शुक्र ) सुया, तोता, सुग्गा । सुप्राउ - वि० दे० (सं० सु + आयु ) दीर्घजीवी, चिरंजीवी, दीर्घायु । सुमन - संज्ञा, पु० दे० ( सं० श्वान ) श्वान, कुत्ता, कूकर । सुमाना - स० क्रि० दे० ( हि० सुना ) उत्पन्न या पैदा करना । स० क्रि० (दे०) सुलाना, साना (दे०) सुचना । सुयामी - संज्ञा, पु० दे० (सं० स्वामी ) स्वामी, मालिक, पति, नाथ । For Private and Personal Use Only
SR No.020126
Book TitleBhasha Shabda Kosh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRamshankar Shukla
PublisherRamnarayan Lal
Publication Year1937
Total Pages1921
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size51 MB
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