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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir आचा www.kobatirth.org 15 आहार लावीने आपोश, तथा तेमन लावेलु खाइश (१) बीजा साधुने आवो अभिग्रह होय के बीजा साधुओने आहार लावीने 21 आपीश पण बीजानो लावेलो खाइश नहि. (२) कोइने आवो अभिग्रह होय के बीजाने माटे आहार लावीने आपीश नहि, पणमत्रम 1 तेमने लावेलो खाइश [३] बीजाने माटे लावीने आपीश नहि तेम लावेलो खाइश पण नहि. आचारमांनो कोइ पण अभिग्रह धारण ॥७८६॥ करे, अथवा प्रथमना त्रणमांनो एक पद वडेज कोइ अभिग्रह करे ते बतावे छे, जे साधुने आवो अभिग्रह होय, के हुँ बीजा ए ॥७८६॥ आहार करतां वधेला आहारवें भोजन करीश, कारण के ते प्रतिमा धारीओने तेवुज एषणीय [खावा योग्य] छे, ते आ प्रमाणे. ल पांच प्राभृतिकामां आग्रह छे, बेनो अभिग्रह छे, तेमज पोताने माटे लीधेला आहारमाथी साधर्मिक साधुनी वैयावच्च निर्जराने उद्दे शीने करे, जो, के तेमणे प्रतिमा धारण करेली होवाथी एक जग्याए भेगा थइने न खाय, पण तेमनो अभिग्रह एक सरखो होवाथी सांभोगिक छे, अने तेथी तेवा उत्तम साधुना उपकरण लाक्वा माटे हवे वैयावच्च करूं. आवो अभिग्रह कोइ ले, तथा बीजुं बतावे छे. [वा शब्दथी बीजो पक्ष बतावे छे अपि शब्द पुनाना अर्थमां छे] अथवा हुं तेमणे लीधेली गोचरीमाथी ४ निर्जराने उद्देशीने साधर्मिकाए करेली वैयावच्चने स्वीकारीश अथवा जे बीजानी वैयावञ्च करे तेनी हुं अनुमोदना करीश के हे साधो ! तमे बहु सारु यु छे ! एव॒ वचन बोलीश, तथा काया वडे तथा प्रसन्न मनवाळा भाववडे अनुमोदना करीश, आ वधुं शा माटे करे ? कर्मनी लघुता माटे. आ प्रमाणे कोइ पण अभिग्रह धारण करेलो अचेल के सचेल साधु शरीर पीडा होय अथवा न होय, पण पोतान * आयु थोडं रहेलं जाणीने उद्यत मरण स्वीकारे, ते बतावे छे: जस्स णं भिक्खुस्स एवं भवइ-से गिलामि खलु अहं इमम्मि समए इमं सरोरगं अणु For Private and Personal Use Only
SR No.020011
Book TitleAcharanga Stram Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilankacharya
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1934
Total Pages186
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_acharang
File Size10 MB
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