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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir आचा ॥८३॥ दुविहा बायरपुढवी समासओ साहपुढवि खरपुढवी साहाय पंचवण्णा अवरा छत्तीसइविहाणा ॥७२॥ संक्षेपथी घादर पृथिवी चे प्रकारनी छे. मुंबाळी चादर पृथिवी, अने खडबचडी बादर पृथिवी, तेमां मुंवाळी बादर पृथियो । सूत्रम् | लीली, काळी, लाल, पीळी अने धोळी, एम पांच प्रकारनी छे. अहिआ गुणना भेदथी गुणीनो भेद जाणवो. हवे खडवचडी 2 पृथिवी ३६ प्रकारनी छे ते वतावे छे. ॥८३॥ पुढवो य सक्करा वालुगा, य उवले सिला य लोणूसे । अय तंव तउअ, सीसग, रुप्प सुवपणे यवइरेय ॥७३॥ हरियाले हिंगुलए, मणोसिलासासगंजण पवाले। अब्भपडलब्भवालअ, बायरकाएमणिविहाणा ॥७॥ गोमेजए य रुयगे, अंको फलिहे य लोहियक्खे य । मरगय मसारगल्ले भुयमोयग इंदनिले य ॥७५ ॥ चन्दप्पह वेरुलिए, जलकंते चेव सूरकते य। एएखरपुढवीए, नामं छत्तीसयं होइ ॥ ७६ ॥ पहेली गाथामां पृथिवीना चौद भेद छे. बीजीमा हरिताल विगेरे आठ अने श्रीजीमां गोमेदक विगेरे दश अने चोथीमां चंद्रकान्त विगेरे चार भेद छे. अहिं पहेली वे गाथावडे सामान्य पृथिवीना भेद कह्या ए उत्तरनी थे गाथाओवढे मणिना भेद बताव्या. आ गाथाओ स्पष्ट होबाथी टीकाकारे वधारे खुलासो कर्यो नथी. पण सामान्य बुदिवाळा माटे बधा भेदो लखीए छीए (१) पृथीवी । (२) शर्करा (3) वालुका (४) उपल (५) शीला (६) लुण (७) उस (८) लोई (९) तांबु (१०) तरवु (११) सीमं (१२) रुघु For Private and Personal Use Only
SR No.020008
Book TitleAcharanga Stram Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilankacharya
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1932
Total Pages214
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_acharang
File Size5 MB
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