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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ७१० भक्ष्याभत्य विचार । हुआ मसाला दूसरेही दिन अभक्ष्य हो जाता है। १३, पकवान-पकवान या मिठाइका जब तक रुप रस या गन्ध नहीं बिगड़े तबतक भक्ष्य रहते हैं । बरसातके दिनोंमें उत्तम रीतिसे बनायी हुइ मिठाइ पन्द्रह दिन गरमीमें २० दिन तथा जाड़ेमें एक महीने तक भक्ष्य रहती है । हलवाईकी दूकानकी मिठाईका समय यह नहीं हो सकता; क्योंकि इसका कोई ठीक नहीं रहता कि उसने कब मिठाई बनायी। अगर वर्ण, गन्ध, रसमें फर्क पड़ जाये तो इस समयके पहले हो अभक्ष्य हो जाती है। दूकानकी मिठाईमें बहुतेरे दोष हैं । इसलिये जहाँतक होसके घरपरही बनवानी चाहिये । बरसातमें तो भूलकर भी हलवाई की दूकानकी मिठाई नहीं खानी चाहिये। १४, बेसनकी चीजें सेव, गॉठिया, बंदिया दालमोठ आदि बेसनकी चोजोंका समय मिठाई. के हो समान जानना । भुजिया, कचौरी, पूरी, मालपुआ आद नरम चीजें तो दूसरे ही दिन बासी हो जाती हैं । इसलिये अभक्ष्य हैं। For Private And Personal Use Only
SR No.020001
Book TitleAbhayratnasara
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKashinath Jain
PublisherDanmal Shankardas Nahta
Publication Year1898
Total Pages788
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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