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________________ ४७५ वीतभय पहेरेलु (६) न० (हाथीने) अंकुश भोंकवं ते वोतभय वि० निर्भय; भयरहित - वीतराग वि० आसक्ति के तृष्णा विनानुं (२) रंग विनानुं वीतसूत्र न० जनोई ; उपवीत वीति पुं० घोडो (२) स्त्री० जq ते (३) उत्पत्ति (४) भोग; भोजन (५) कांति; तेज (६) निवृत्ति; अंत वीथि स्त्री० रस्तो; मार्ग (२) पंक्ति (३) बजार; दुकान (४) घोडाने केळववानुं मेदान वीथिका स्त्री० मार्ग; रस्तो (२)चित्रो दोरेली भीत; कागळनो वींटो, जेना उपर चित्रो दोर्यां होय . वीथी स्त्री० जुओ ‘वीथि' [वेलु वीयीकृत वि० पंक्ति के ढगलामा गोठवीनाह पु० कूवानुं ढांकण के मथाळू वोप्सा स्त्री० व्याप्ति (२) पुनरुक्ति वीर वि० शूरवीर; बलिष्ठ (२) उत्तम; श्रेष्ठ (३) पुं० पराक्रमी योद्धो (२) वीररस (३) नट (४) पुत्र (५) पति (६) यज्ञनो अग्नि बीरण न० सुगंधी वाळो वीरपट्टिका स्त्री० कपाळ उपर पुरुषो वडे पहेरातो सोनानो पटो बीरपान न० सैनिको युद्ध पहेलां के पछी जे स्फूर्तिदायक पीणुं पीए छे ते वीरलोक पुं० इंद्रनुं स्वर्ग (वीर लोको पामे छे ते) होय तेवी स्त्री वीरवती स्त्री० पति अने पुत्र जीवता वीरस्थान न० वीरामन (२) स्वर्ग । वीरहन पुं० अग्निहोत्र न करनार ब्राह्मण (२) बालहत्या करनारो वीरायते आ० (वीरनी पेठे पराक्रम करवू) वीराशंसन न० रणभूमि वीरासन न० योगर्नु एक आसन (२) एक ढींचण टेकवीने बेसवू ते वीरुध् स्त्री० लता; फेलाती वेल वीरुष पुं० वृक्ष वीरुधा स्त्री० जुओ 'वीरुध्' वीर्य न० बळ; ताकात (२) शुक्रधातु (३) तेज (४) सोनुं [मेळवेलु वीर्यशुल्क वि० पराक्रम वडे खरीदेखेंवीवर्ष पुं० भार; बोजो (२)अनाजनो संचय (३) मार्ग; रस्तो (४) भार. वहेवानी जूसरी [इच्छावाळं वर्ष वि० वरवानी - पसंद करवानी वृ १५० ९ उ० पसंद करवू (२) वरदान मागवू (३) लग्न माटे पसंद करवू (४) मागवू; याचईं (५) ढांकद् (६) घेरवु (७) निवारवू (८) १० उ० पसंद करवू (९) लग्न माटे पसंद करवू (१०) याचवू वृक पुं० वरु वृकोदर पुं० भीमसेन वृक्ष पु० झाड वृक्षक पुं० नानुं झाड (२) झाड वृक्षतक्षक पुं० झाड कापनारो वृक्षांध्रि पुं० वृक्ष- मूळ व २ आ० तजq; छांडq (२) ७ प० तजवू (३) पसंद करवू (४) प्रायश्चित्त करवू (५) हरी जवू; लई लेवं (६) १५०, १० उ० तजवू (७) बाद राखवू; छांड, वजिन वि० वांकुं; वळेलं (२) दुष्ट'; पापी (३) पुं० वाळ (४)दुष्ट माणस (५) न० पाप (६) दुःख ; आपत्ति (आ अर्थमां पुं० पण) वृत् ४ आ० पसंद करवू; गमवू (२) वहेंचवू (३) १० उ० प्रकाशवू वृत् १ आ० होवू; रहेवू (२) बनवू; यद् (३) प्रवर्तमान थव (४) निर्वाह थवो (५) घूमवू; फरवु (६) लवलीन थर्बु (७) वर्तन राखq (८) अनुसर, (९) अर्थ थवो - होवो (१०) परिणाम लाव Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016092
Book TitleVinit Kosh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGopaldas Jivabhai Patel
PublisherGujarat Vidyapith Ahmedabad
Publication Year1992
Total Pages724
LanguageHindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size14 MB
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