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________________ मायामग ३७९ मार्गायात मायामृग पुं० मायावी हरण मारी स्त्री० जुओ 'मारि' मायायोधिन् वि० माया के छळकपटथी मारीच पुं० एक राक्षस (जेणे मायावी लडनारुं वापरेला शब्दो मृगनुं रूप धरी सीताना हरणमां मदद मायावचन न० खोटा - छळकपटथी करी हती) (२) कश्यप ऋषि (३) मायाविन् वि० माया, छळकपट के न० पीपरनी वेलो, झुंड वापरनारं; तेमां कुशळ (२)मिथ्या; मारुत वि० मरुत् देवो संबंधी (२)पवन भ्रम के आभासरूप (३) पुं० जादुगर संबंधी; पवनवाळू (३) पुं० पवन मायिन् वि० जुओ 'मायाविन्' (२) (४) वायुदेव (५) प्राणवायु पुं० जादुगर (३) छळकपट करनारो मारुतसूनु पुं० हनुमान (२) भीम (४) शिव (५) ब्रह्मा (६) कामदेव मारतायन न० बारी (गोळ आकारनी) मायूर वि० मोरनुं; मोर संबंधी; मोर- मारुति पुं० हनुमान (२) भीम माथी उत्पन्न थयेलु (२) मोरना पीछांनुं मारुती स्त्री० वायव्य खुणो (२) मरुतो बनेलं (३) मोर जोडेलु (वाहन) (४) - देवोनी पुत्री मोरने प्रिय (५) न० मोरन टोळं मार्कट वि० मर्कट -मांकडा जेवं मायरक, मायरिक पुं० मोर पकडनारो मार्ग १ ५०, १० उ० शोध; खोळवं (२) मोरना पीछांनी वस्तुओ बना- (२) -नी पाछळ पडवू (३) मेळववा वनारो जीवनाएं प्रयत्न करवो (४) मागवू; याचवू मायोपजीविन् वि० माया- छळकपटथी (५) १० उ० जq (६) शणगारवू मार पुं० हिंसा; वध (२) विघ्न; मार्ग वि० मृग संबंधी; मृगनुं डखल (३) कामदेव (४) कामविकार मार्ग पुं० रस्तो (२)गोचर; क्षेत्र (३) (५)मृत्यु (६) शयतान जेवो ललचावीने (घानो) डाघ ; चिह्न (४) पद्धति; नाश करनार देव (बौद्ध०) रीत; शैली (५) रूढि (६) नृत्य, मारक वि० हणनारं; मारनाएं (समा- संगीत के अभिनयनी उच्च शैली (७) सने छेडे) (२) पुं० कामदेव (३) न० हरणोनुं टोळु महामारी (४) न० बधां प्राणीओनो मार्गण वि० शोधतुं; खोळतुं (२)पूछतुं प्रलयकाळे नाश (३) मागतुं (४)न० भीखवू के मागवू मारकत वि० मरकत मणिनुं ते (५) आजीजी करवी ते (६)तपास मारजित् पुं० शंकर (२) बुद्ध भगवान (७) पुं० भिखारी (८) बाण मारण न० वध ; हिंसा (२) शत्रुनो मार्गणा स्त्री० मागवू के याचq ते (२) नाश करवा मंत्रतंत्रनो प्रयोग करवो ते तपास करवी ते (३) शोधq ते मारव वि० मरुभूमि संबंधी मार्गतोरण न० रस्ता उपर ऊभी करेली मारात्मक वि० खूनी; हिंसक अभिनंदन माटेनी कमान के दरवाजो मारारि पुं० शिव (कामने बाळनार) मार्गदुम पुं० रस्तानी बाजुए ऊगेलं झाड मारांक वि० कामविकारनां लक्षणवाळू मार्गविनोदन न० मुसाफरीमां आनंदमारि स्त्री० महामारी; मरकी प्रमोदनुं साधन मागशर महिनो मारित वि० हणेलं (२) नष्ट करेलु मार्गशिर, मार्गशिरस, मार्गशीर्ष पुं० मारिष पुं० (सूत्रधार वडे मुख्य नटने मार्गस्थ वि० मुसाफरी करतुं, मार्गे चडेलं करात) मानवाचक संबोधन (नाट्य०) मार्गागत, मार्गायात पुं० मुसाफर Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016092
Book TitleVinit Kosh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGopaldas Jivabhai Patel
PublisherGujarat Vidyapith Ahmedabad
Publication Year1992
Total Pages724
LanguageHindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size14 MB
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