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________________ अप्पउलिओसहिभक्खणया अंग सुत्ताणि शब्दसूची अप्पत्तजोव्वणा अप्पउलिओसहिभवखणया [अपक्वौषधिभक्षण] अप्पझंझ [अल्पझंझ] ठा० ८।१११ उवा० ११३८ अप्पडिकम्म [अपतिकर्मन्] भ० २।४६. पण्हा० अप्पएस [अप्रदेश] भ० ५।२०५ १०१११ अप्पक [आत्मक] पण्हा० ३।२४ अप्पडिकुट्ठ [अप्रतिऋ ष्ट] ठा० २।४१३ अप्पकंप [अप्रकम्प ] सू० २।२।६४ अप्पडिपुण्ण [अप्रतिपूर्ण ] सू० २।२।३२, ५७, ६२, ७५ अप्प कम्मतर [अल्पकमंतर] भ० १३।४३; १९५६ अप्पडिपूयय [अप्रतिपूजक] सम० ३०।१।२५ अप्प कम्म [अल्पकर्मन् ] ठा० ४।१, ४२६ से ४२६. भ० अप्पडिबद्ध [अप्रतिबद्ध] सू० २।२।६४, ६५. ठा० ६।२२; १९६१ ___४१५७१, ५७२. नाया० १।५।३५, ३७. अंत० ६।५२. अप्पकम्मतराग [अल्पकर्मतरक] भ० १।६३, ८६ पण्हा०१०१११ अप्प कम्मतराय [अल्पकर्मतरक] भ० ५।१३३; अप्पडिबद्धया [अप्रतिबद्धता] भ० १७१४८ ७.६७ से ७०, ७२, १५८, २२७, २२८; १८१०० अप्पडिलेहिय [अप्रतिले खित] उवा० ११४२ अप्पकालिय [ अल्पकालिक] भ०६।१७४ अप्पडिलोमय। [अप्रतिलोमता] भ० २५४५६७ अप्पकिरिय [अल्पक्रिय] ठा० ४।४२६ से ४२६. भ० अप्पडिवाइ [अप्रतिपातिन् ] भ० २५।६०६ ६.२२; १९४२ से ४५, ५० से ५३, ५६ अप्पडिवाति [अप्रतिपातिन् ] ठा० ४।६६ अप्पकिरियतर [अल्मक्रियातर] भ० १६०५६ अप्पांडविरय |अप्रतिविरत| सू० २।१।२२, ३१,३८, अप्पकिरियतराय [अल्पक्रियातरक] भ० ५।१३३ ; ४७; २।२।५८; २।४।१७; २।७।२२, २४ ७.१५८, २२७, २२८; १८१०० अप्पडिहय [अप्रतिहत] सू० २।२।६४; २।४।१, ३, ५, अल्पग [आत्मक] आ० ८।८।२१. सू० १।१।३६; १।२। १० से १६, २०. सम० १।२. भ० १७, ४८ से ५०. ६१, १।३।४२; १।४।५१. पण्हा० ३।२२ नाया० १।१।७; १।१६।१८६; २।१।१६. अणु० अ-पगंय [अल्पग्रन्य] सू० २।२।६५ ३।७५. विवा० २।५।१ अप्पग्घ [अल्पाय ] भ० ३।२६८ अप्पडिहयगइ [अप्रतिहतगति] नाया० ११५३५ अपच्चक्खाणकसाय [अप्रत्याख्यानकषाय] सम० अप्पडियहगति [अप्रतिहतगति ] पण्हा० १०११ १६॥२, २११२ अप्पडीक र [अप्रतीकार] पण्हा ० १।३० अप्पच्चक्खाणकिरिया [अप्रत्याख्यानक्रिया] भ० अप्पणया [आत्मन् ] भ० ११।३५; १६।११ ११७१,८०,६७, ७।१६३, १६४ अप्पणिच्चिय [आत्मीय] भ० २।७६, ८० अप्पच्चय [अप्रत्यय] पहा० २।२; ३।२ अप्पणिज्जित [आत्मीय ] ठा० ३६ अप्पच्चयकारक [अप्रत्ययकारक] पण्हा० २।१, अप्पणिज्जिय [आत्मीय] ठा० ३६ अप्पतर [अल्पतर] आ० चू० ३।१४. भ० ११४६ अप्पच्छण्ण [अप्रच्छन्न] भ० १५।१०२ अप्पतरराग [अल्पतरक] भ० ७।२२८ अप्पजुइयतर [अल्प द्युतिकतर] भ० १३।४३ अप्पतराय | अल्पतरक] भ० १।६१,८७, ७।१५८%, अप्पजुतियतर [अल्पद्युतिकतर] भ० १३।४३ ८।२४६ अप्पज्जत्तग [अपर्याप्तक] भ० २५।२ अम्पतिडाण [अप्रतिष्ठान] आ० ५।१२६.. ठा० अप्पज्जत्तय [अपर्याप्तक] भ० ६।४२ ३।१३५; ५।१६६; ७७४ अप्पज्जत्ता [अपर्याप्तक] भ० ८।३६८; ३३।३, ६ अप्पतुमंतुम [अल्पतुमन्तुम] ठा० ८।१११ . अप्पज्जुइतराय [अल्पद्युतितरक] भ०७।१५८ अप्पत्त [अप्राप्त] आ० ६।३।६ अप्पजूहिय [अप्रयुथिक ] आ० चू० ११४४ . अस्पत्तजोवणा [अप्राप्तयौवना] ठा० ५।१०४ . १६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016053
Book TitleAgam Shabdakosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahapragna Acharya
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1980
Total Pages840
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationDictionary, Dictionary, Agam, Canon, & agam_dictionary
File Size17 MB
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