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________________ अगि-अद्विकसंकम परिक्षित : १६३ अग्गि (पृ ४) अच्छिद्द (अणासव) अग्गिकुंड (अग्घुप्पत्ति) अच्छिन्न (सकल) अग्गिट्ठ (अग्घुप्पत्ति) अछलणा (दया) अग्गिसिहा (हुतासिणा सिहा) अजर (सिद्ध) अग्गिहोत्त (बंभण) अजरामर (अचल) अग्गिहोत्तरति (बंभण) अजीवाभिगम (जीवाभिगम) अग्धातित (४) अजोग (अणल) अग्घुप्पत्ति (४) अज्जावेयव्व (हंतव्व) अग्र (पृ ४) अज्जीवाइवात (अहिंसा) अग्रेसरत्व (पोरेवच्च) अज्झत्थिय (पृ ४) अचंचल (असाहस) अज्झयण (पृ ५) अचंचलसील (अबालसील) अज्झयणछक्कवग्न (आवस्सय) अचपल ( ४) अज्झवसाण (पणिहाण) अचल (पृ ४) अज्झवसाण (मणसंकप्प) अचलित (धुवक) अज्झवसायठाण (संजमठाण) अचलिय (अभीय) अज्झीण (अज्झयण) (अणुविग्ग) अज्झीत (उवचार) अचवल अचवल (अतुरिय) अज्झोववज्जइ (सज्जइ) अचवल (असाहस) अज्झोववण्ण (पृ ५) अचिंतण (असरण) अझोववण्ण (लोलुय) अचियत्त (पृ ४) अज्झोववण्ण (मुच्छिय) अचोक्ख (असुइ) अज्झोस (पृ ५) अच्चण (थुइ) अज्ञ (बाल) अच्चलीण (अणुपविट्ठ) अज्ञानावृत (मन्द) अच्चि (मुम्मुर) अच्चि अट्ट (अलिय) अच्चित (वंदित) अट्ट (मागासस्थिकाय) अच्चिय (पृ ४) अट्यते (अद्य ते) अच्छ (पृ ४) अट्टिक (णिम्मंसक) अच्छ (तरच्छ) अट्ठिकलेवर (णिम्मंसक) अच्छ (मंदर) अट्ठिकसंकल (जिम्मंसक) अट्ट Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016050
Book TitleEkarthak kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahapragna Acharya, Kusumpragya Shramani
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1984
Total Pages444
LanguagePrakrit, Sanskrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size12 MB
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