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________________ ३२४ पुद्गल-कोश परमाणुपोग्गले जहण्णगुणसीयस्स परमाणुपोग्गलस्स दवट्ठयाए तुल्ले, पएसट्टयाए तुल्ले, ओगाहणट्टयाए तुल्ले, ठिईए चउट्ठाणवडिए, वण्ण-गंधरसेहि छट्ठाणवडिए, सीयफासपज्जवेहि य तुल्ले, उसिणफासे न भण्णंति, णिद्ध-लुक्ख-फासपज्जवेहि छट्ठाणवडिए। एवं उक्कोसगुणसीए वि। अजहण्णमणुक्कोसगुणसीए वि एवं चेव। नवरं सट्टाणे छट्ठाणवडिए । ५४७x xx। एवं उसिणे निद्ध लुक्खे जहा सीए । परमाणुपोग्गलस्स तहेव परिववखो सम्वेसि न भण्णइ ति भाणियन्वं । - पण्ण० प ५ । सू ५३८, ४४, ४७, ५३ । पृ० ३६६ से ३६९ जघन्य गुण काले वर्णवाले परमाणु पुद्गल में अनंतपर्याय होते हैं । जघन्य गुणकाले परमाणु का अन्यान्य जघन्य गुणकाले परमाणु पुद्गल से तुलना। (१) द्रव्यार्थ से-तुल्य । (२) प्रदेशार्थ से-तुल्य । (३) अवगाहनार्थ से-तुल्य । (४) स्थिति अपेक्षा-चतुःस्थान हीनाधिक वा तुल्य । (५) काले वर्ण से-तुल्य है। (६) अवशेष वर्ण से नहीं होते हैं। (७) गंध-रस-स्पर्श अपेक्षा से-षट्स्थान होनाधिक वा तुल्य । जघन्य गुण काले वर्ण परमाणु पुद्गल में भी गंध-रस-स्पर्श गुणों के पर्याय अनंत होते हैं अतः जघन्य गुण काले वर्णवाले परमाणु पुद्गल में भी इन अपेक्षाओं से अनंत पर्याय होते हैं-ऐसा निरूपण किया गया है। ___ जघन्य गुण कृष्णवर्णवाले (एक गुण कृष्णवर्णवाले ) परमाणु पुद्गल जघन्य गुण कृष्णवर्णवाले परमाणु पुद्गल से द्रव्य रूप से तुल्य होते हैं। जघन्य गुण कृष्णवर्णवाले परमाणु पुद्गल जघन्य गुण कृष्णवर्णवाले परमाणु पुद्गल से प्रदेश रूप से तुल्य है। जघन्य गुण कृष्णवर्णवाले परमाणु पुद्गल जघन्य गुण कृष्णवर्णवाले परमाणु पुद्गल से अवगाहनरूप से तुल्य है । Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016030
Book TitlePudgal kosha Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMohanlal Banthia, Shreechand Choradiya
PublisherJain Darshan Prakashan
Publication Year1999
Total Pages790
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size12 MB
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