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________________ पिता। सिलिसिअ-सिस्स संक्षिप्त प्राकृत-हिन्दी कोष ८४९ सिलिसिअ देखो सिलिछु । | फाल्गुन माप को कृष्ण चतुर्दशी । °सेण सिलीमुह पुं [शिलीमुख) बाण । रावण का | पुं [°सेन] ऐरवत वर्ष में उत्पन्न एक अर्हन । एक योद्धा । सिवंकर पुं [शिवङ्कर] पाँचवें केशव का सिलीस देखो सिलेस = श्लिष् । सिलुच्चय पुं [शिलोच्चय] मेरु पर्वत । सिवक । पुं [शिवक] घड़ा तैयार होने के पर्वत । सिवय । पूर्व की एक अवस्था । वेलन्धर सिलेच्छिय पुं [शिलैक्षिक] मत्स्य-विशेष । नागराज का एक आवास-पर्वत । सिलेम्ह देखो सिलिम्ह ( षड् )। सिवा स्त्री[शिवा]भ० नेमिनाथ जी की माता । सिलेस सक [ श्लिष् ] आलिङ्गन करना। सौधर्म देवलोक के इन्द्र की एक अग्र-महिषी । सिलेस पुं [श्लेष] वज्रलेप आदि संधान । पनरहवें जिनदेव की प्रवर्तिनी। शृगाली । आलिङ्गन, भेंट। संसर्ग। दाह । एक पार्वती। शब्दालंकार। सिवाणंदा देखो सिव-नंदा। सिलेस देखो सिलिम्ह। गिवासि पुं [शिवाशिन्] भरतक्षेत्र में अतीत सिलोअ । पुं [श्लोक] कविता। यश । उत्सर्पिणी-काल में उत्पन्न बारहवें जिनदेव । सिलोग | काव्य बनाने की कला । प्रशंसा । सिविण देखो सुमिण । सिलोच्चय देखो सिलुच्चय । सिविया स्त्री [शिविका] सुखासन, पालकी । सिल्ल पुं [दे] कुन्त, बरछा । एक जहाज । सिविर न [शिविरछावनी । सैन्य । सिल्ला देखो सिला। °र पुं [°कार] शिला सिव्व सक [सी] सीना, साँधना । सिव्व देखो सिव - शिव । पट, पत्थर गढ़नेवाला। सिव्विणी । स्त्री [दे] सूई । सिल्हग न [सिह लक] गन्ध-द्रव्य-विशेष । सिव्वी सिल्हा स्त्री [दे] शीत, जाड़ा । सिम देखो सिलेस - श्लिष । सिव न [शिव] मङ्गल । सुख । अहिंसा । पुं. सिसिर न [दे] दधि । मुक्ति । वि. मङ्गल-युक्त, उपद्रव-रहित । सिसिर पुं [शिशिर] ऋतु-विशेष, माघ तथा पुं. महादेव । जिनदेव । भ० महावीर के पास दीक्षित एक राजर्षि । पाँचवें वासुदेव तथा फागुन का महीना । माघ मास का लोकोत्तर फागुन मास । वि. जड़, ठंढा । हलका । न. बलदेव का पिता । देव-विशेष । पौष मास हिम। किरण पुं. चन्द्रमा । °महीहर पुं का लोकोत्तर नाम । एक देव-विमान । [°महीधर] हिमालय पर्वत । छन्द-विशेष । कर न. शैलेशी अवस्था की प्राप्ति । मुक्ति-मार्ग । गइ स्त्री[गति] सिसिरली देखो सिस्सिरिली। मुक्ति। वि. मुक्त। पं. भारतवर्ष में | सिसु पुन [शिशु] बालक । आल पुं अतीत उत्सपिणी-काल में उत्पन्न चौदहवें [काल] बाल काल । नाग पुं. क्षुद्र कोट, जिन-देव । °तित्थ न [°तीर्थ] काशी। अलस । °पाल पुं ["पाल] एक राजा । यव °नंदा स्त्री [°नन्दा] आनन्द-श्रावक की पुन. तृण-विशेष । °वाल देखो °पाल । पत्नी। 'भूइ पुं [°भूति] एक जैन महर्षि । सिस्स पुंस्त्री [शिष्य] चेला, छात्र । स्त्री. बोटिक मत-दिगंबर जैन सम्प्रदाय का "स्सिणी। स्थापक एक मुनि । रत्ति स्त्री [रात्रि] | सिस्स देखो सीस = शीर्ष । १०७ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016020
Book TitlePrakrit Hindi kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorK R Chandra
PublisherPrakrit Jain Vidya Vikas Fund Ahmedabad
Publication Year1987
Total Pages910
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size19 MB
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