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________________ ५९७ पेट्ट पेच्छा-पेल्लय संक्षिप्त प्राकृत-हिन्दी कोष पेच्छा स्त्री [प्रक्षा] तमाशा, नाटक । °घर न भगवान पार्श्वनाथ की सन्तान में उत्पन्न जैन [°गृह] देखो °हर । °मंडव पुं [°मण्डप] | मुनि । भगवान् महावीर के पास दीक्षा लेकर नाट्य-गृह, प्रेक्षकों के बैठने का स्थान । हर अनुत्तर विमान में उत्पन्न जैन मुनि । न. [गृह] खेल तमाशा का स्थान । पेढिया देखो पीढिआ प्रस्तावना । पेज्ज देखो पा = पा का कृ. । पेढी देखो पीढी। पेज्ज पुन [प्रेमन्] अनुराग। °दंसि वि | पेणी स्त्री [प्रैणी] हरिणी का एक भेद । [दर्शिन्] अनुरागी। पेदंड वि [दे] जुए में हार गया हो वह । पेज्ज वि [प्रेयस् ] अत्यन्त प्रिय । पेम पुन [प्रेमन्] प्रेम, स्नेह । पेज्ज वि [प्रेज्य] पूज्य । पेमालुअ वि [प्रेमिन्] प्रेमी। पेज्ज देखो पेर - प्र + ईरय । पेम्म देखो पेम। पेज्जल न [दे] प्रमाण । पेम्मा स्त्री प्रेमा छन्द-विशेष । पेज्जलिअ वि [दे] संघटित । पेया स्त्री. वाद्य-विशेष, बड़ी काहला । पेज्जा देखो पेआ। पेर सक [प्र+ ईरय] पठाना, भेजना। धक्का पेज्जाल वि [दे] विपुल, विशाल । लगाना, आघात करना। आदेश करना । पेट , न [दे] उदर । किसी कार्य में जोड़ना। पूर्वपक्ष करना, प्रश्न करना, सिद्धान्त का विरोध करना । प्रेरणा पेट देखो पिट्ठ = पिष्ट। करना । गिराना । पेड देखो पेडय। पेरंत देखो पज्जंत । °चक्कवाल न ['चक्रपेडइअ पुं [दे] धान्य आदि बेचनेवाला । वाल] बाह्य परिधि । वच्च न [°वर्चस् ] पेडक । न [पेटक] यूथ । मण्डप, तृणादि-निर्मित गृह । पेडय। पेरग वि [प्रेरक] प्रेरणा करनेवाला, पेडा स्त्री [पेटा] मञ्जूषा । पेटाकार चतुष्कोण पूर्वपक्षी । गृह-पंक्ति में भिक्षार्थ-भ्रमण । पेरण न [दे] ऊर्ध्व स्थान । खेल, तमाशा । पेडाल पुं [दे. पेटाल] बड़ी पेटी । पेरिज्ज न दे] साहाय्य, सहायता, मदद । पेडावइ पं [पेटकपति] यूथ का नायक । | पेरुल्लि वि [दे] पिण्डीकृत । पेडिआ स्त्री [पेटिका] मञ्जूषा । पेलव वि. सुकुमार, मृदु । पतला, कुश । सूक्ष्म, पेड़ स्त्री पुं [दे] महिष । लघु । पेड्डा स्त्री [दे] भीत । दरवाजा । भैंस । पेलु स्त्री. रुई की पूणी । करण न. पूणी बनाने पेढ देखो पीढ = पीठ। का उपकरण, शलाका आदि । पेढाल वि [दे] विपुल । वर्तुल, गोलाकार । | पेल्ल सक [क्षिप्] फेंकना । पेढाल वि [पोठवत्] पीठ-युक्त । पेल्ल देखो पेर =प्र+ईरय । पेढाल पुं. भारतवर्ष का आठवाँ भावी जिन- पेल्ल सक [पीडय] पीलना, दबाना, पीड़ना । देव । ग्यारह रुद्र पुरुषों में दसवां । एक ग्राम, | पेल्ल सक [पूरय] पूरना, भरना । जहाँ भगवान् महावीर का विचरण हुआ | पेल्ल पुन [दे] बालक । था । न. एक उद्यान । °पुत्त पुं [पुत्र] पेल्लय पुं [पेल्लक] महावीर के पास दीक्षा भारतवर्ष का आठवां भावी जिन-देव । ले अनुत्तर विमान में उत्पन्न जैन मुनि । www.jainelibrary.org Jain Education International For Private & Personal Use Only
SR No.016020
Book TitlePrakrit Hindi kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorK R Chandra
PublisherPrakrit Jain Vidya Vikas Fund Ahmedabad
Publication Year1987
Total Pages910
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size19 MB
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