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________________ नंदिमाणग] ( २६४ ) [नंदी fruit. सम० ११; dvipa. सम. प. २४०; प्रव. २१८ नंदिमाणग. पुं० (नन्दिमाणक) मे तनुं (२) विषा सत्र नहि नामर्नु छ पक्षी. एक जाति का पी. A species of ययन. विपाक सूत्र का नंदिषण नामक _birds. पण्ह० १,१; छठा अध्ययन. the sixth chapter नंदिय. पु. ( नन्दिक ) नदीसत्र. नही so named of the Vipāka Sūtra. सिधान्त. नंदीसूत्र; नंदी सिद्धान्त. Nandi ठा० १०, १; Satra ( a scripture ). भग०८, २; नंदिसेणा. स्त्री. ( नन्दिसेना) पश्चिम त२. नंदिय. त्रि. (नन्दित ) मानन्द युत समृ ફના અંજનગિરિ પર્વતની પૂર્વ બાજુની हिवान. श्रानन्द युक्त; समृद्धिवान. Joy. पु.रिणी पायर्नु नाम पश्चिम तरफ के ful, prosperous. ज. प. ३, ४३; अंजनगिरि पर्वत की पूर्व दिशाकी पुष्करिणी भग. २, १; बावडी का नाम. Name of Puskarini नंदिलखमण. पुं. (नन्दिलचमण) से नामना well to the east of the mount मशु स्वामिनी मे शिष्य. इस नाम का मंगु Alijanagiri of the west. प्रव. स्वामी का एक शिष्य. A disciple so १५०२ named of Mangu Svami. नंदी. नंदिस्सर. पुं. ( नंदीश्वर ) नहीश्वर नामने। स्थ. २६; माहादी५. नंदीश्वर नाम का श्राठवां द्वीप. नंदिवद्धण. पु. ( नन्दिवर्धन ) महावीर The 8th continent named स्वामीना भाटा मानु नाम. महावीर Nandisvara. भग० ३, १; स्वामी के बड़े भ्राता का नाम. Name of मंदिस्सरवर. पुं. (नन्दिश्वरवर) मे नामने। the elder brother of Mahāvira १५ अने समुद्र. इस नाम का द्वीप और Svami. कप्प. ५, १०३, प्राया० २, समुद्र. A continent and a sea of १५, १७७; this name. सू. प. १८; नंदिवद्धणा. स्त्री. ( नन्दिवर्धना ) अनगिरि नंदी. पुं० श्री. ( नन्दी ) २६ eles પર્વતની ઉત્તર દિશાની પુષ્કરિણી વાવડીનું સૂત્રમાંનું ૧૧ મું સૂત્ર: નદી નામે સૂત્ર. રદ नाम. अंजनगिरि पर्वत के उत्तर तरफ की उत्कालिक सूत्रों में से 11 वां सूत्रः नन्दी पुष्करिणी वावड़ी का नाम. Name of नामका सूत्र. The 11th of the 29 Puşkariņi well to the vorth of Utkálika Sūtras; the original the mount Alijanagiri. प्रव. scripture named Nandi. Hj. १४६३; ४३, विशे० १०; ( २ ) सोमनी पर्याय नंदिसेण. पुं० ( नन्दिसेण ) यूना पाय श६. लोभ का पर्याय वाचक शब्द. એરાવત ક્ષેત્રમાં ચાલુ અવસર્પિણમાં થએલ a synony m for greed. सम. ५२; योथा तीर्थ:२. जंबू द्विपान्तर्गत ऐरावत (३) गधार मामनी पहेली भूक ना. क्षेत्र के वर्तमान अवसर्पिणी में उत्पन्न चौथे गन्धार ग्रामकी पहिली मूर्च्छना. the तीर्थकर. The 4th Tirthankara in 1st note of the Gāndhāra the present aeon of decrease gamut अणुजो० १२८, (४) मामा in Airavata Kse tra of Jambu- ही अने समुद्रतुं नाम आठवें द्वीप और Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016015
Book TitleArdhamagadhi kosha Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatnachandra Maharaj
PublisherMotilal Banarasidas
Publication Year1988
Total Pages705
LanguagePrakrit, Sanskrit, Hindi, Gujarati, English
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size17 MB
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