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________________ चाउरुसालग ] ( ७१४ ) प्रकार के संघ. the four classes, viz. male and female ascetics and male and female disciples. चाणक्क. पुं० ( चाणक्य ) पाटलीपुत्रना चंद्रગુપ્તરાન્તના મંત્રી કે જેના ઊપર ચંદ્રગુપ્તના પુત્ર બિન્દુસારને અભાવા થવાથી તેણે મત્રીપદ છેડયું, માબાપની અનુજ્ઞા લઇ સ ग्रंथी निवृत्त या संथारे। ये. पाटलीपुत्र चन्द्रगुप्त राजा का मंत्री कि जिसके साथ चन्द्रगुप्त के पुत्र बिन्दुसार का वैरभाव उत्पन्न होनेसे उसने मन्त्रीपद का त्याग किया मा-बाप की अनुज्ञा लेकर सर्व प्रारंभ से निवृत्त होकर संधारा किया. The minister of Chandragupta, king of Pataliputra, who being on hostile terms with Chandragupta's son Bindusära, resigned his post and desisting from all worldly activities with the permission of his parents, practised Santhārā. “ पाडलिपुत्तम्मि पुरे चाको नाम विस्सुधां श्रासी सन्चारंभमियतो इंगिणीमरणं अह निवन्नो " संथा० ७३; पिं० नि० ५००; भक्त० १६२; चारपूर. पुं० ( चाणूर ) से नामने। ये भ चाउस्सालय न० ( चतुःशालक ) भुखो उपसेो शब्६. देखो ऊपर का शब्द Vide above. जं० प०५, ११४: चाग. पुं० (त्याग) त् हेतुं ते; त्याग त्याग. Abandoning; renunciation. पंचा. १०, १४; – रूव. न० (-रूप ) त्यागरूप. त्याग रूप. marked by renunciation. पंचा० ५, १३; सनी सलामा वासुदेवे भायें. इस नामका एक मल्ल जिसको कंस की सभा में वासुदेव ने मारा. Name of a wrestler who was killed by Vasudeva in the court of Kansa. परह ० १,४; चाटुकर. त्रि० (चाटुकार ) प्रिय वयन मोक्षना२. प्रिय बचन बोलनेवाला. Speaking | चामर न० (चामर) नाथी पवन नयाय छे. sweet words. श्रोव ० ३१; તે મર-ચામરી ગાયના વાળનું બનાવેલું चाटुकारग. त्रि० ( चाटुकारक) लुभो उपा होय छे ते. जिससे हवा की जाती है वह ६. देखो ऊपरका शब्द. Vide above. चमर - चमरी गाय के पुच्छ के बालों की बनाई जं० प० ३, ६७; जाती है वह चंवर. A chawari usualचाटुयार. त्रि. (चाटुकार ) भी मधुर मो ly made of the bushy tail of a cow and used as a fan. जं०प० ४, ७४; ५, ११४; ओब० १०, ३१; उत २२, ११; भग० १, १, ७, ६; ६, ३३; २. मिष्ट - मधुर बोलने वाला. ( One ) who speaks sweet words. परह ० १, २; १०; भग० १६, ६ २०, ८ - श्राइण्ण. त्रि० ( -आकीर्ण - चत्वारो वर्णास्तेनाकुल: कीर्णः ) यार वर्षा - साधु साध्वी, श्राव याने श्राविडार्थी व्यास (संघ). चार वर्ण - साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका से व्याप्त ( संघ ). &n assembly ) consist - ing of four classes viz. male and female ascetics and male and female disciples. समणस्स भगवश्री महावीरस्स चाउवचा इन्ने संघे ठा० १०; भग० १६, ६; २०, ८ चाउरसालग. न० ( चतुःशालक ) यार भालवासुं भवन चार मंजिल वाला मकान A four-storyed mansion जं० प० २, ११४; Jain Education International [ चामर For Private Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016014
Book TitleArdhamagadhi kosha Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatnachandra Maharaj
PublisherMotilal Banarasidas
Publication Year1988
Total Pages1016
LanguagePrakrit, Sanskrit, Hindi, Gujarati, English
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size25 MB
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