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________________ आचा ॥९५५॥ बीजो उद्देशो. (प्रकरण) । पहेलो उद्देशा कहीने बीजो कहे छे, तेनो आ प्रमाणे संबंध छे, के गया उद्देशामां गृहस्थना घरमां वास करतां थता दोषो । सूत्रम् बताव्या, अहींया पण तेवा विशेष दोषो वसति संबंधी बतावे छे. गाहावई नामेगे मुइसमायारा भवंति, से भिक्खू य असिणाणए मोयसमायारे से तगंधे दुग्गंधे पडिकूले पडिलोमे यावि भवइ, नं पुवं कम्मं तं पच्छा कम्मं जं पच्छा कम्म, तं पुरे कम्म, तं भिक्खुपडियाए वट्टमाणा करिज्जा.वा नो करिजा वा, अह भिक्खूणं पु० जं तहप्पगारे उ० नो ठाणं ॥ (मू० ७२) केटलाक गृहस्थो शुचि समाचारवाळा भागवत विगेरेना भक्त अथवा भोगीओ ( वारंवार स्नान करनारा अथवा सुगंधी चंदन | अगर केसर कर्पूर विगेरे वस्तुनो लेप करनार शोखीनो ) होय छे, अने साधुओ तेवी रीते वारंवार के एकवार खास कारण विना ? | फासु पाणीथी पण ब्रह्मचर्यना भंगना दोपने लीधे स्नान करनारा नथी, तथा कारण प्रसंगे मोया (पेशाब) नो पण, उपयोग करनारा छे. (ज्यारे जंगलमां उतर्या होय अथवा उजड जग्यामां उतर्या होय, त्यां ओचीतो साप करडे तो तेना झेरथी बचवा रातना वैदनी खटपट न वनी शके, माटे पेशावनो उपयोग पूर्व थतो, सांभळवा प्रमाणे ओचीतो खीलो के ठोकर लागी लोही पुष्कळ नीकळ्तुं होय, तो पेशाबनी धारा करवाथी बंध पडे छे, तेवा कोइ पण कारणे वखते कोइ साधुए उपयोग कर्यो होय तो वारंवार स्नान करनारा गृहस्थने दुर्गच्छा थाय) माटे भिक्षु तेनी गंधवाळा छे, तथा कोइनो पेशाब गंधातो होय, परसेवो वास मारतो होय, OSAROSEOCEDASRESCRECR-SCry
SR No.010803
Book TitleAgam 01 Ang 01 Acharang Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhadrabahu, Shilankacharya
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1933
Total Pages890
LanguagePrakrit, Sanskrit, Gujarati
ClassificationManuscript, Agam, Canon, & agam_acharang
File Size40 MB
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