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________________ 1 सूत्रम् ॥२८३॥ स्त्रीए पोताना पति चाणाक्यने वात करी. तेथी धन लेवा नंदराजा पासे गयो त्यां धनने बदले अपमान मळ्यु तेथी चाणाक्ये नं-1 आचा० दराजाना कुलनो नाश कर्यो.) कोइ विचारे छे के मारे पुत्रो जीवता नथी. ते जीवाडवा बीजा आरंभो करे छे, कोइ प्राणी मारी दीकरी दुःखी छे, एवा राग ॥२८३॥ | अथवा द्वेषथी घेला जेवो बनी परमार्थने न जाणतो एवां एवां कृत्यो करे छे के जेनावडे आलोक परलोकमां नवां दुःखोने भोगवे छे. ___जेमके "जरासंध" नामनो प्रतिवासुदेव. पोताना जमाइ कंसना मरणथी पोताना लश्करना अहंकारथी कंसने मारनार "वासुदेव" || है (कृष्ण.) ना उपर कोप करीने तेना पाछळ जइने लडाइ करतां सेना साथे नाश पाम्यो. कोइ तो मारी पुत्रवधु जीवती नथी, तेथी आरंभ विगेरेमा वर्ते छे. कोइ मित्र माटे, कोइ स्वजन. (काका, दिकरा के साळा) माटे क्लेश करे छे. के ए मारा वारंवार परिचयमा आवेला छे. अथवा पूर्वे मारा माता पिता उपकारी हता अने पाछळथी साळा विगेरे उपकारी हता ते अत्यारे दुःखी छे. एम माणीओ कोइना कंइपण निमित्ते शोक करेछे. अथवा जुदा जुदां शोभायमान अथवा घणा हाथी घोडा रथ, आसन, पलंग विगेरे जे उपकरणो छे तेनाथी बमणा, तमणा विगेरे वधारे राखीने बदले छे. तथा भोजन (लाड विगेरे) आच्छादन (पट्ट युगम विगेरे वस्त्र मने मळशे, अथवा मारां'नाश थयां एम रागद्वेष करे छे आ प्रमाणे पाणीओ चेतन वस्तुमां गृध्ध वनीने पूर्वे कहेला माता पिताविगेरेना रागथी आखी जींदगी सूधी प्रमादि रहे छे एटले ए मारांछे. अथवा हुंआ परिवारनो रक्षक छु, पोषण करनारो छ एम ममता करीने मोहीत मनवालो थाय छे. ... . .. RERA KC
SR No.010803
Book TitleAgam 01 Ang 01 Acharang Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhadrabahu, Shilankacharya
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1933
Total Pages890
LanguagePrakrit, Sanskrit, Gujarati
ClassificationManuscript, Agam, Canon, & agam_acharang
File Size40 MB
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