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________________ पक! तुं हवे शामाटे खेद करे छे! पाणी गया पछी पाळो वांधवी नकामी छे. (पोते पोतानां हृदयने ठपको आपे छे के, तारां आचा० वहालां संबंधीने जा केम दीधो? अने हवे, गया पछी रोये शुं थाय? पाणी ज्यारेजोइतुं हतुं त्यारे पाळ बांधीने का रोकी न लीधुं?)४ तथा जेनां घरमां मोत थाय; ते पोते मर्यादाथी भ्रष्ट थाय छे. एटले शरीर, अने मनमां दुःखोथी पीडाय छे. तथा तेज प्रमाणे घj ॥३८६॥ वहाळ सगुं गुजरीगयु होय; तो केटलांक लोको पश्चाताप करे छे के-हे वहाला पुत्र ! हे वहाली स्त्री ! तु मने मुकीने केम जती "8/ रही ? इत्यादि. अथवा कोइ जग्याए कोष करीने गयेलो होय. अर्थात् नाशी गयेलो होय; अने वनेनो वियोग थाय तो पछीथी, है कहे केः-में तारूं कहेवु गुस्सामां न मान्यु तेथी तुं रीसाइने चाल्योगयो. इत्यादि व्यर्थ दुःखो भोगवे छे. आ बधां दुःखो शोक विगेरे जे कह्यां छे, ते वधाए जे मनुष्यो विषय-विपना आश्रयमां अंतःकरणने राखे छे, तेमनी दुःखनी अवस्था सूचवे छे. (केटलीक स्त्रीओ रडी रडीने आंधळी थाय छे, वोइ छाती कुटीने पोतानां नानां वाळकोने अथवा, पोताना गर्भाशयने अथवा, गर्भमा रहेलां वाळकने दुःख आपे छे, केटलीक अज्ञान स्त्रीओ माथां कुटीने पीडाय छे.) अथवा शोक करे छे. एटले यौवन, धन, मद विगेरेना मोहथी घेरायला मनवाळो विरुद्ध कृत्य करीने ज्यारे बुढापो थाय; त्यारे, मोतनो समय आवतां मोह दूर थतां पस्ताय छे. के, में दुर्भागीए पूर्वमां वधा श्रेष्ठ पुरुषोए आचरेलो सुगतिमा जवाना एक हेतुरूप अने दुर्गतिद्वार अटकाववाने बारणांनी पाछली भुगळसमान धर्म न कर्यो. कहुं छे केः "भवित्री भूतनां परिणतिमनालोच्य नियतां । पुरा यद्यत् किञ्चिद्विहितमशुभं यौवनमदात् ॥ PROGTRYGGSR6% SASSEMERGESSAGE
SR No.010803
Book TitleAgam 01 Ang 01 Acharang Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhadrabahu, Shilankacharya
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1933
Total Pages890
LanguagePrakrit, Sanskrit, Gujarati
ClassificationManuscript, Agam, Canon, & agam_acharang
File Size40 MB
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